आज रविवार है, आराम का दिन। लेकिन जीवन में आगे बढ़ने और कुछ बड़ा करने की प्रेरणा कभी छुट्टी नहीं लेती। ‘संडे मोटिवेशन’ की इस खास सीरीज में आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक ऐसे जांबाज अफसर से, जिनका नाम सुनते ही भ्रष्टाचारियों के पसीने छूट जाते हैं। हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) की।

19 साल के करियर में 20 से भी ज्यादा बार ट्रांसफर! कोई आम इंसान होता तो शायद सिस्टम के आगे घुटने टेक देता। लेकिन तुकाराम मुंढे हर ट्रांसफर के बाद और ज्यादा मजबूत होकर उभरे हैं। आइए जानते हैं एक किसान के बेटे से लेकर देश के सबसे ईमानदार अफसरों में शुमार होने तक का उनका यह सफर।

हालिया एक्शन: IIT बॉम्बे, हाई कोर्ट कैंटीन से लेकर बड़ी कंपनियों पर ‘सिंघम’ की रेड

तुकाराम मुंढे इस समय महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर हैं और पद संभालते ही उन्होंने साबित कर दिया कि उनके लिए कानून के आगे सब बराबर हैं:

 IIT बॉम्बे और हाई कोर्ट परिसर पर एक्शन: नियमों की अनदेखी करने पर FDA ने IIT बॉम्बे की मेस में काम रोकने के कड़े आदेश थमाए, तो वहीं बॉम्बे हाई कोर्ट और मंत्रालय परिसर की बिना लाइसेंस चल रही कैंटीनों के संचालन पर भी तुरंत रोक लगा दी।

 बड़ी कंपनियों और ब्रांड्स पर शिकंजा: पैकेज्ड फूड, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स बनाने वाली नामी मल्टीनेशनल कंपनियों को अस्वास्थ्यकर तरीकों और भ्रामक विज्ञापनों के लिए कड़े नोटिस जारी किए गए हैं।

 करोड़ों का मिलावटी सामान जप्त: मुंबई, भिवंडी और बीड जैसे इलाकों से उनकी टीम ने छापेमारी कर करोड़ों रुपये का मिलावटी खाद्य तेल, अवैध कॉस्मेटिक्स और नकली मिठाइयां जप्त की हैं।

किसान के घर से निकलकर UPSC टॉपर बनने तक का सफर

तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के एक बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ था। सरकारी जिला परिषद स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने वाले तुकाराम ने बचपन से ही गरीबी और सामाजिक समस्याओं को बेहद करीब से देखा था। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास की और 2005 में IAS अधिकारी बने। अपनी पहली ही पोस्टिंग (सोलापुर) में उन्होंने अवैध रेत और शराब माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

जब उनके सपोर्ट में सड़कों पर उतर आई जनता

नियमों के पक्के तुकाराम मुंढे कभी किसी राजनीतिक दबाव या नेताओं के आगे नहीं झुके। नवी मुंबई में नगर निगम कमिश्नर रहते हुए जब उन्होंने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की, तो नेताओं ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर दिया। लेकिन इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक सख्त अफसर के समर्थन में हजारों आम लोग और सोसायटियां सड़कों पर उतर आईं।

“काम ऐसा करो कि जब आपका ट्रांसफर हो, तो भ्रष्टाचारियों के चेहरे पर खुशी और आम जनता की आँखों में आँसू हों।” – यही तुकाराम मुंढे की कार्यशैली की पहचान है।

आज का संडे मोटिवेशन: आपको सीखना चाहिए

1. ईमानदारी की राह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं: अगर आप सही हैं, तो कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती।

2. परिस्थितियों को दोष मत दीजिए: एक छोटे से गांव और साधारण परिवार से निकलकर भी देश का सबसे चर्चित और ईमानदार अफसर बना जा सकता है।

3. कमिटमेंट (प्रतिबद्धता): आपकी जगह बदली जा सकती है, लेकिन आपकी नीयत और आपकी काबिलियत को कोई नहीं बदल सकता।

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