नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन से चर्चा में आई ‘Gen Z’ छात्रा और कंटेंट क्रिएटर उर्वशी पलांडुरकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में बीजेपी छत्तीसगढ़ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो/फोटो शेयर कर प्रदर्शनकारी युवाओं पर तंज कसा गया था। पोस्ट में उर्वशी के प्रदर्शन वाले डांस वीडियो को एक तरफ रखकर लिखा गया था— “बाबर की विरासत पर ठुमके लगाने वाले Gen Z”, जबकि दूसरी तरफ राष्ट्रपति से सम्मानित युवा को दिखाया गया था। अब इस राजनीतिक तंज का उर्वशी ने बड़े ही शांत, स्मार्ट और व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब देकर सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। ‘डिवाइड एंड रूल नहीं चलेगा’— PPT से दिया करारा जवाब बीजेपी के इस पोस्ट पर पैनिक होने या गुस्सा करने के बजाय उर्वशी ने एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) और वीडियो रील्स के जरिए अपनी बात रखी। उर्वशी ने कहा: “आप उस Gen Z को आपस में बांटने की कोशिश कर रहे हैं जिसकी एकजुटता ने संसद तक को हमारी भाषा बोलने पर मजबूर कर दिया। 2026 में अब ‘फूट डालो और राज करो’ (Divide and Rule) की नीति काम नहीं करने वाली।” उर्वशी ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि बीजेपी की सोशल मीडिया टीम का “कैप्शन गेम” काफी कमजोर है और उनका AI टूल उन्हें सही सुझाव नहीं दे पा रहा है। मेडल्स से भरा कमरा दिखाया, बोलीं— ’10वीं और 12वीं में आए थे 93% मार्क्स’ बीजेपी के उस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कि प्रदर्शन करने वाले युवा पढ़ाई-लिखाई से भटके हुए हैं, उर्वशी ने अपने कमरे में रखी ट्रॉफियों, मेडल्स और सर्टिफिकेट्स की झलक दिखाई। अकादमिक रिकॉर्ड: उर्वशी ने बताया कि उन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों में 93% अंक हासिल किए हैं। मल्टी-टैलेंटेड पहचान: उन्होंने दिखाया कि उनके पास पढ़ाई के साथ-साथ डांस, योग, कराटे और अन्य नेशनल-स्टेट लेवल प्रतियोगिताओं के ढेरों मेडल्स हैं। कला और पढ़ाई साथ-साथ: उन्होंने कहा, “मैं इस बात का जीता-जागता सबूत हूँ कि एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज, कला और पढ़ाई एक साथ बेहतरीन तरीके से चल सकते हैं।” सोशल मीडिया पर मिला भारी समर्थन उर्वशी का यह अनोखा और तर्कपूर्ण जवाब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। आम लोगों के साथ-साथ कई विपक्षी नेताओं और युवा वर्ग ने उर्वशी के इस बेबाक अंदाज़ की जमकर तारीफ की है। युवाओं का कहना है कि अपने अधिकारों और देश के मुद्दों पर सवाल उठाना किसी को ‘दिशाहीन’ नहीं बनाता, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक होने की पहचान है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation Sunday Special:19 साल में 20 से ज्यादा ट्रांसफर, फिर भी नहीं झुका यह IAS; जानिए ‘सिंघम’ तुकाराम मुंढे की कहानी 48 घंटे बाद भी थम नहीं रहीं सांसें… मलबे में छिपी जिंदगी और अपनों की तलाश! जानिए कोलंबिया में आए उस भयानक भूकंप की अब तक की पूरी कहानी।