दफ्तर में बैठकर शिकायत बंद करने का खेल खत्म, तहसीलदार खुद करेंगे मौके की जांच; आम जनता को मिलेगा सीधा फायदा

विदिशा:

जिले में रास्ता विवाद और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे से परेशान आम लोगों के लिए राहत भरी खबर है। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज होने वाली ऐसी शिकायतों को लेकर विदिशा कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब तहसीलदार और नायब तहसीलदार को खुद मौके पर जाकर जमीन, सरकारी नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करनी होगी। केवल पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर दफ्तर में बैठकर शिकायतों का निराकरण दिखाना अब पूरी तरह अमान्य होगा।

फैसले की मुख्य बातें:

  • मौके पर भौतिक सत्यापन: शिकायत मिलते ही संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार खुद स्थल निरीक्षण करेंगे।
  • दस्तावेजों का मिलान: मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान सरकारी नक्शे और खसरा-खतौनी से किया जाएगा।
  • पटवारी रिपोर्ट पर रोक: सिर्फ पटवारी की एकतरफा रिपोर्ट पर शिकायत को बंद नहीं किया जा सकेगा।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: जांच पूरी होने और समस्या का ठोस हल निकलने के बाद ही सीएम हेल्पलाइन पोर्टल (181) पर जवाब दर्ज होगा।

आम जनता को क्या होगा फायदा?

  • सालों पुराने विवादों का स्थायी समाधान: रास्तों के बंद होने या खेतों की मेढ़ दबाने जैसे मामलों में अक्सर कागजों पर कार्रवाई पूरी दिखा दी जाती थी। अब मौके पर वरिष्ठ अधिकारी के पहुंचने से विवाद का वास्तविक और स्थायी हल निकलेगा।
  • फर्जी रिपोर्ट और मिलीभगत पर लगाम: कई बार निचले स्तर पर मिलीभगत या गलत रिपोर्ट के कारण पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिल पाता था। तहसीलदार स्तर के अधिकारी की मौजूदगी से पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • समय और पैसों की बचत: बार-बार सीएम हेल्पलाइन या तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
  • अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई: मौके पर राजस्व टीम की सीधी जांच से अवैध कब्जा करने वालों पर तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई संभव होगी।

​प्रशासन के इस सख्त कदम से जिले में जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में भरोसा और मजबूत होगा।

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