नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया है। लेकिन इस पूरी कार्रवाई के तरीके ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पुलिस का सादी वर्दी (Plain Clothes) में आना और सोनम वांगचुक को चारों तरफ से सफेद चादरों से घेरकर ले जाना अब बड़े सवालों के घेरे में है।

सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या था, जिसे पुलिस जनता और मीडिया की नजरों से छुपाना चाहती थी?

सफेद चादरों का घेरा और सादी वर्दी: आखिर क्यों?

शनिवार जंतर-मंतर पर अचानक हलचल बढ़ गई। जब पुलिस सोनम वांगचुक को उठाने पहुंची, तो वहां मौजूद लोग दंग रह गए। पुलिसकर्मी खाकी वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में थे। इतना ही नहीं, जैसे ही वांगचुक को मंच से नीचे उतारा गया, पुलिसकर्मियों ने उन्हें बड़ी-बड़ी सफेद चादरों से चारों तरफ से कवर कर दिया, ताकि मीडिया के कैमरे या जनता उनकी एक झलक भी न देख सके।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं:

 कैमरों और लाइव वीडियो से डर?

जानकारों का मानना है कि पुलिस को डर था कि अगर सोनम वांगचुक की कमजोर स्थिति या पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें लाइव सोशल मीडिया पर आ गईं, तो देश भर में जन आक्रोश भड़क सकता है। चादरों का इस्तेमाल केवल मीडिया की कवरेज को रोकने के लिए किया गया था।

 जनता की सहानुभूति रोकने की कोशिश?

21 दिनों के उपवास के बाद सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी थी। उनकी इस हालत को देखकर जनता में उनके प्रति सहानुभूति और सरकार के खिलाफ गुस्सा और ज्यादा न बढ़ जाए, शायद इसीलिए प्रशासन ने इस पूरी तस्वीर को छुपाने की कोशिश की।

 गोपनीय ऑपरेशन की रणनीति:

पुलिस इस कार्रवाई को बिना किसी हंगामे या भीड़ के विरोध के तुरंत निपटाना चाहती थी। सादी वर्दी के कारण प्रदर्शनकारी शुरुआत में पुलिस की रणनीति को समझ नहीं पाए और मोबाइल जैमर लगने के कारण कोई तुरंत मदद भी नहीं बुला सका।

प्रशासन का क्या कहना है?

दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था। पुलिस के अनुसार, सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही थी और डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत थी। किसी भी तरह की अफवाह या भीड़ को इकट्ठा होने से रोकने के लिए यह तरीका अपनाया गया, ताकि उन्हें बिना किसी बाधा के सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया जा सके।

क्या छुपाने की थी कोशिश?

विपक्ष और सोनम वांगचुक के समर्थकों का आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे एक नागरिक को अपराधियों की तरह छुपाकर ले जाना प्रशासन की घबराहट को दर्शाता है। जंतर-मंतर जैसी खुली जगह पर, जहाँ हर आंदोलन पर जनता की नजर होती है, वहां इस तरह की गोपनीयता ने पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में हैं, लेकिन जंतर-मंतर का यह ‘सफेद चादर वाला ऑपरेशन’ आने वाले दिनों में सरकार और दिल्ली पुलिस के लिए जवाब देना मुश्किल करने वाला है।

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