28 फरवरी 2026 मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया, जब इज़रायल ने अमेरिका के प्रत्यक्ष समर्थन से ईरान की राजधानी तेहरान और कई अहम सैन्य व परमाणु ठिकानों पर एक बड़ा सैन्य हमला बोल दिया। इस अचानक और बड़ी कार्रवाई ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। कूटनीतिक बातचीत के विफल होने के बाद उठाए गए इस कदम से वैश्विक स्तर पर एक नए और विनाशकारी युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। हमले के मुख्य कारण क्या हैं? रक्षा विशेषज्ञों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस सैन्य अभियान के पीछे निम्नलिखित अहम कारण हैं: • परमाणु कार्यक्रम पर प्रहार: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता के पूरी तरह विफल होने के बाद, पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को डर था कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब है। इस हमले का प्राथमिक लक्ष्य ईरान के बचे हुए न्यूक्लियर फैसिलिटीज को नष्ट करना है। • ‘प्री-एम्प्टिव’ कार्रवाई (Pre-emptive Strike): इज़रायल और अमेरिका ने इस हमले को बचाव के लिए उठाया गया कदम बताया है। उनका दावा है कि ईरान इज़रायल और अमेरिकी ठिकानों पर एक बड़े हमले की योजना बना रहा था, जिसे समय रहते नाकाम करना ज़रूरी था। अमेरिका की भूमिका और राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा संदेश इस सैन्य अभियान में अमेरिका सीधे तौर पर इज़रायल के साथ खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को लेकर कड़े बयान जारी किए हैं: • सैन्य ताकत को खत्म करने का लक्ष्य: ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री और उनकी नौसेना (Navy) को पूरी तरह तबाह करना है, ताकि भविष्य में वे अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए कोई खतरा न बन सकें। • सत्ता परिवर्तन (Regime Change) का प्रयास: अमेरिका ने इस हमले के साथ-साथ ईरान की घरेलू राजनीति में भी दखल दिया है। ट्रंप ने सीधे ईरान की आम जनता से अपील की है कि वे अपनी मौजूदा सरकार को सत्ता से बेदखल कर दें। ज़मीनी हालात: इमरजेंसी और खौफ का माहौल हमले के तुरंत बाद दोनों देशों और आसपास के क्षेत्रों में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं: • इज़रायल में आपातकाल: ईरान की तरफ से होने वाले संभावित जवाबी मिसाइल हमले के डर से इज़रायल ने पूरे देश में ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ लागू कर दी है। नागरिकों को बंकरों के पास रहने के निर्देश दिए गए हैं। • हवाई यातायात ठप: ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके चलते मिडिल-ईस्ट से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं। निष्कर्ष: पिछले साल जून 2025 में इज़रायल और ईरान के बीच हुए 12-दिवसीय युद्ध के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा टकराव है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के बाकी देश हालात पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि इस युद्ध का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation जयमाला के दौरान खून से लाल हुआ स्टेज: बक्सर में सिरफिरे आशिक ने दुल्हन को मारी गोली, आरोपी फरार पीएम मोदी के लौटते ही ईरान पर हमला: ओवैसी ने उठाई ‘टाइमिंग’ पर उंगली, पूछा- “60 हज़ार भारतीयों की सुरक्षा का क्या?”