रायसेन/ मध्य प्रदेश: रायसेन से आया सूदखोरी का एक मामला इन दिनों हर किसी के होश उड़ा रहा है। कलेक्ट्रेट में मजबूत पकड़ रखने वाले एक रसूखदार ठेकेदार सहित 8 सूदखोरों ने मिलकर एक कियोस्क संचालक को ₹1 करोड़ के कर्ज जाल में फंसाकर कंगाल कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है, लेकिन पूरे शहर में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है— जो इंसान खुद दिन-रात बैंकिंग का काम करता है, लोगों के पैसों का लेन-देन संभालता है, वो आखिर इतना बेवकूफ कैसे बन गया कि ₹30 हजार रोज का ब्याज देने लगा? आइए समझते हैं इस पढ़े-लिखे इंसान की ‘महा-बेवकूफी’ के पीछे का असली खेल और यह भी कि आखिर इतने पैसे का उसने किया क्या था।

बैंकिंग का मास्टरमाइंड इस चक्रव्यूह में कैसे हुआ फेल?

एक आम आदमी सूदखोरों के जाल में फंसे तो समझ आता है, लेकिन एक कियोस्क संचालक (जो खुद मिनी बैंक चलाता है) का फंसना हैरान करता है। दरअसल, वह बेवकूफ नहीं था, बल्कि इन 3 वजहों से उसका दिमाग पूरी तरह ब्लॉक हो गया था:

1. ‘इमरजेंसी’ में बैंक की कागजी औपचारिकताएं भारी पड़ीं:

कियोस्क संचालक को अपने बिजनेस को बढ़ाने और पुरानी कुछ उधारी चुकाने के लिए तुरंत ₹15 लाख की जरूरत थी। वह जानता था कि बैंक से लोन लेने में हफ्तों लग जाएंगे और सिविल स्कोर से लेकर दुनिया भर के कागज देने होंगे। इसी हड़बड़ी में उसने सूदखोरों से तुरंत कैश ले लिया— यही उसकी पहली और सबसे बड़ी भूल थी।

2. रोज के ब्याज (मीटर ब्याज) का साइकोलॉजिकल गेम:

सूदखोरों ने उसे ‘मीटर ब्याज’ के जाल में फंसाया। इसमें ब्याज सालाना या मंथली नहीं, बल्कि रोजाना जुड़ता है। ₹2500 रोज या ₹50 हजार प्रति सप्ताह का गणित शुरुआत में उसे लगा कि वह अपने बिजनेस की कमाई से चुका देगा। लेकिन जब कियोस्क की कमाई से ज्यादा ब्याज होने लगा, तो पहले का ब्याज चुकाने के लिए उसने दूसरे से कर्ज लिया, फिर तीसरे से। इस तरह वह कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) के दलदल में धंसता चला गया।

3. रसूखदारों का खौफ और ‘इमेज’ का डर:

पढ़े-लिखे लोगों की सबसे बड़ी कमजोरी होती है उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा। मुख्य आरोपी ब्रजेश परिहार एक ठेकेदार है ,जब आरोपियों ने पीड़ित के पिता के चेक, स्टांप पेपर और पत्नी के गहने दबा लिए और जान से मारने की धमकी दी, तो पढ़ा-लिखा कियोस्क संचालक बदनामी के डर से पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाया। डर के मारे उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था।

आखिर इतने रुपयों का कियोस्क संचालक ने क्या किया?

पब्लिक में चर्चा थी कि क्या कियोस्क वाले ने यह पैसा कहीं उड़ा दिया? लेकिन सच यह है कि:

 पीड़ित ने इस पैसे का 90% से ज्यादा हिस्सा केवल पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में ही उड़ा दिया।

 उसने कोई अय्याशी नहीं की, बल्कि मुख्य आरोपी ठेकेदार को ही वह पिछले 4 महीनों से ₹30 हजार रोज का सिर्फ ब्याज दे रहा था।

 यानी, एक कर्ज को छिपाने और उसका ब्याज भरने के चक्कर में उसने करोड़ों रुपए बाजार से उठाए और सब सूदखोरों की तिजोरी में चले गए।

मामला दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

कंगाल होने और प्रताड़ना से तंग आकर जब पीड़ित परिवार आत्महत्या की कगार पर पहुंच गया, तब उसकी पत्नी ने हिम्मत दिखाई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मध्य प्रदेश ऋणीय संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और ठेकेदार समेत सभी 8 आरोपियों के खिलाफ वित्तीय जांच शुरू कर दी है।

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