नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में लाठियां भांजने वाले संदिग्धों को लेकर चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की जांच के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है। वीडियो में बिना वर्दी के छात्रों पर बेरहमी से डंडे बरसाने वाला कोई बाहरी शख्स नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस का ही एक सिपाही निकला है, जिसकी पहचान हनी डागर के रूप में हुई है।

इस खुलासे के बाद अब आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी हो चुकी है और उसके खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है।

कैसे खुली सिपाही हनी डागर की पोल?

कल जंतर-मंतर पर हुए बवाल के बाद कई वीडियो सामने आए थे, जिसमें खाकी वर्दी के बीच कुछ लड़के हाथ में डंडा लेकर छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते दिख रहे थे। हुलिया देखकर कयास लगाए जा रहे थे कि ये कोई असामाजिक या बाहरी तत्व हैं। लेकिन जब छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पर दबाव बढ़ा, तो आंतरिक जांच में यह साफ हो गया कि सादे कपड़ों में दिख रहा यह शख्स दिल्ली पुलिस का जवान हनी डागर ही है।

अब होगी FIR, सस्पेंशन की भी तैयारी

बिना वर्दी और बिना किसी आधिकारिक पहचान के प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करना पुलिस नियमों का सीधा उल्लंघन है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सिपाही हनी डागर के खिलाफ न सिर्फ विभागीय कार्रवाई की जा रही है, बल्कि कानून को हाथ में लेने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप में FIR दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही उसे तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) भी किया जा सकता है।

छात्र संगठनों ने कहा- “बाकी चेहरों का भी सच सामने आए”

सिपाही हनी डागर की पहचान होने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों और उनके संगठनों ने राहत तो जताई है, लेकिन उनका कहना है कि मामला यहीं खत्म नहीं होता। छात्रों का आरोप है कि वीडियो में हनी डागर के अलावा भी कुछ और लोग सादे कपड़ों में लाठियां चला रहे थे। छात्रों ने मांग की है कि पुलिस प्रशासन निष्पक्षता दिखाते हुए उन बाकी चेहरों का सच भी जनता के सामने लाए।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिसकर्मी का सादे कपड़ों में आकर हिंसक कार्रवाई करना बेहद गंभीर मामला है। यह सुप्रीम कोर्ट के उन दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि कानून-व्यवस्था संभालते समय पुलिसकर्मी की पहचान (यूनिफॉर्म या चेस्ट बैच) साफ दिखनी चाहिए। हनी डागर पर दर्ज होने वाली यह FIR विभाग के अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश होगी।

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