वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे लंबे तनाव के बाद अब शांति की उम्मीद नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ डील पर बातचीत अपने आखिरी दौर में पहुंच चुकी है। ट्रम्प ने दावा किया है कि इस डील को लेकर खाड़ी देशों और इजराइल के साथ भी चर्चा पूरी हो चुकी है।

लेकिन, यह डील अमेरिका के लिए इतनी आसान नहीं होने वाली है। ईरान ने इस डील को फाइनल करने से पहले अमेरिका के सामने 5 बड़ी और कड़ी शर्तें रख दी हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ईरान की मांगें:

ईरान की 5 प्रमुख शर्तें जिन पर अटका है पेंच:

1. 2.5 लाख करोड़ की संपत्ति हो डीफ्रीज (मुक्त): ईरान की पहली शर्त यह है कि विदेशों में उसकी जितनी भी संपत्ति फ्रीज (जब्त) की गई है, उसे तुरंत खोला जाए। यह रकम करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कतर में जमा है, जो लगभग 25 हजार करोड़ रुपये है।

2. 450 किलो यूरेनियम अपने पास रखने की जिद:

ईरान के पास इस समय लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम है, जो 60% तक रिफाइन (परिशोधित) किया जा चुका है। ईरान किसी भी कीमत पर इसे अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार नहीं है। वह इस यूरेनियम को अपने ही पास रखना चाहता है।

3. युद्ध का हर्जाना (मुआवजा): ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका ने उस पर यह युद्ध थोपा है, इसलिए अमेरिका को इसका भारी मुआवजा देना होगा। इसके अलावा, ईरान ने खाड़ी देशों- खासकर सऊदी अरब, यूएई (UAE) और कतर से भी हर्जाना मांगा है।

4. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अधिकार: ईरान फिलहाल होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल रहा है और वह इस पर अपना कंट्रोल छोड़ना नहीं चाहता। अगर यह डील फाइनल होती है, तो भी होर्मुज ईरान के ही प्रभाव में रहेगा। ट्रम्प के अनुसार, डील होने के बाद होर्मुज में समुद्री जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम 30 दिन का समय लगेगा।

5. भविष्य में ‘नो वॉर गारंटी’ (युद्ध न करने का वचन): ईरान की एक बड़ी शर्त यह भी है कि अमेरिका और इजराइल को यह पक्की गारंटी देनी होगी कि वे भविष्य में कभी भी लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हूतियों पर कोई सैन्य कार्रवाई या हमला नहीं करेंगे।

ट्रम्प प्रशासन इस डील को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है, लेकिन ईरान की इन भारी-भरकम शर्तों ने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका ईरान की इन सभी 5 बातों को मानता है, या फिर बातचीत का यह दौर बिना किसी नतीजे के ही खत्म हो जाएगा।

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