अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर मुहर, 60 दिनों में लागू होंगी शर्तें !

नई दिल्ली/वाशिंगटन/ तेहरान :

लंबे समय से युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) हो गया है, जिसने पूरी दुनिया को एक बड़े महायुद्ध के खतरे से बचा लिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस समझौते को ईरान की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। ईरान का दावा है कि अमेरिका को उसके कड़े रुख के आगे झुकना पड़ा है और उसकी ‘अकड़’ टूट गई है।

इस 14 सूत्रीय शांति समझौते के तहत दोनों देशों ने न केवल युद्ध से पीछे हटने का फैसला किया है, बल्कि ईरान के लिए अरबों डॉलर के पैकेज की घोषणा भी की गई है। आइए जानते हैं इस समझौते की 3 सबसे बड़ी बातें:

1. $300 अरब डॉलर का डेवलपमेंट फंड: मुआवजा या निवेश?

इस समझौते में सबसे बड़ा आकर्षण $300 अरब डॉलर (लगभग ₹25 लाख करोड़) का डेवलपमेंट फंड है।

 ईरान का दावा: ईरान की सरकारी मीडिया इसे युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे (War Reparations) के रूप में प्रचारित कर रही है और इसे अपनी बड़ी जीत मान रही है।

 अमेरिका का रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे सीधे तौर पर ‘मुआवजा’ मानने से इनकार किया है। अमेरिका का कहना है कि यह एक ‘इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट फंड’ है। इसमें खाड़ी के अमीर देश (जैसे UAE) और प्राइवेट कंपनियां ईरान के पुनर्निर्माण के लिए निवेश करेंगी, बशर्ते ईरान शांति की सभी शर्तों को पूरा करे।

2. $24 अरब डॉलर के फ्रीज अकाउंट्स होंगे बहाल

आर्थिक मोर्चे पर ईरान को एक और बड़ी राहत मिली है। विदेशों के बैंकों में ईरान की जब्त (Frozen) पड़ी लगभग $24 अरब डॉलर (लगभग ₹2 लाख करोड़) की संपत्ति को अमेरिका रिलीज करने के लिए तैयार हो गया है। इस पैसे का इस्तेमाल ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और जरूरी सामान खरीदने के लिए कर सकेगा।

3. प्रतिबंधों से मिलेगी मुक्ति, फिर शुरू होगा तेल का खेल

अमेरिका पिछले कई सालों से ईरान के तेल निर्यात (Crude Oil Export) पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए था। इस समझौते के बाद अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक और बैंकिंग प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाएगा। इससे ईरान का कच्चा तेल एक बार फिर वैश्विक बाजार में आ सकेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें भी कम होने की उम्मीद है।

अभी 60 दिनों का ‘विंडो पीरियड’ बाकी

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभी एक शुरुआती समझौता (MoU) है। इसे पूरी तरह जमीन पर लागू होने में 60 दिनों का समय लगेगा। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारी अंतिम शर्तों और नियमों को तय करेंगे।

फिलहाल के लिए ट्रंप प्रशासन के आक्रामक रुख में आई यह नरमी और ईरान का कड़ा पलटवार दुनिया के लिए राहत की खबर लेकर आया है, जिससे मिडिल ईस्ट में फिलहाल बारूद की गंध शांत होती दिख रही है।

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