नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश की तीन प्रमुख विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इन उपचुनावों के नतीजों ने एक तरफ जहाँ नए राजनीतिक समीकरण बनाए हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ पुरानी साख को भी मजबूत किया है। तीन सीटों पर हुए इन मुकाबलों में बीजेपी, कांग्रेस और जन सुराज पार्टी को 1-1 सीट हासिल हुई है।

हर सीट पर कौन जीता, किसे हार मिली और इन सीटों पर पहले किसका दबदबा रहा है:

1. बांकीपुर (बिहार): प्रशांत किशोर की धमाकेदार एंट्री

 विजेता: प्रशांत किशोर (जन सुराज पार्टी)

 किसे हराया: नीरज कुमार सिन्हा (बीजेपी)

 जीत का अंतर: 15,000+ वोट

सीट का इतिहास और दबदबा: > बांकीपुर सीट (पूर्व में पटना पश्चिम) बीते तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला मानी जाती थी। यहाँ 1995 से बीजेपी लगातार जीतती आ रही थी। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इस सीट से लगातार 5 बार (2006 से 2025 तक) विधायक रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी।

बड़ा उलटफेर: चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरकर बीजेपी के इस 30 साल पुराने ‘गढ़’ को ध्वस्त कर दिया और जन सुराज पार्टी का खाता खोला।

2. दतिया (मध्य प्रदेश): कांग्रेस का पलटवार

 विजेता: घनश्याम सिंह (इंडियन नेशनल कांग्रेस)

 किसे हराया: आशुतोष तिवारी (बीजेपी)

 वोट प्रतिशत: कांग्रेस को 42.39% वोट मिले

सीट का इतिहास और दबदबा: > दतिया सीट लंबे समय तक बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का गढ़ रही है। नरोत्तम मिश्रा ने 2008, 2013 और 2018 में लगातार तीन बार यहाँ से बीजेपी का परचम लहराया था। हालांकि, 2023 के आम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को हराकर यह सीट छीनी थी।

3. मांजलपुर (गुजरात): बीजेपी का गढ़ रहा सुरक्षित

 विजेता: सतीन्द्रभाई पटेल उर्फ सतीश पटेल (बीजेपी)

 किसे हराया: भीखाभाई रबारी (कांग्रेस)

जीत का अंतर: 30,600+ वोट

सीट का इतिहास और दबदबा: > वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट की स्थापना (2008 परिसीमन) के बाद से ही यहाँ बीजेपी का एकछत्र राज रहा है। बीजेपी के दिग्गज नेता योगेश पटेल 2012, 2017 और 2022 में रिकॉर्ड वोटों से यहाँ से जीतते आ रहे थे। उनके निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया था।

इन उपचुनावों के नतीजों ने दिखाया है कि जहाँ गुजरात में बीजेपी का कैडर-बेस पूरी तरह मजबूत है, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने अपनी पकड़ बनाए रखी है। सबसे बड़ा सरप्राइज बिहार से आया है, जहाँ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उदय ने राज्य के पारंपरिक राजनीतिक ढाँचे को हिलाकर रख दिया है।

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