तेहरान/वाशिंगटन।

मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। पिछले कई महीनों से जिस अमेरिका-ईरान युद्ध का खतरा पूरी दुनिया पर मंडरा रहा था, वह फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की सरकार के बीच एक बड़े शांति समझौते (Peace Deal) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। लेकिन इस डील के होते ही ईरान के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक गृहयुद्ध छिड़ गया है।

ईरान की ताकतवर सेना (IRGC) ने अपनी ही सरकार के इस फैसले को अमेरिका के सामने ‘शर्मनाक सरेंडर’ करार दिया है, जिससे तेहरान की सड़कों पर तनाव फैल गया है।

क्या है इस ‘महाडील’ की 3 बड़ी शर्तें?

परमाणु कार्यक्रम पर ब्रेक: ईरान को अपना सालों से इकट्ठा किया गया 440 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (60% शुद्धता) पूरी तरह नष्ट करने के लिए किसी तीसरे देश या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा।

25 अरब डॉलर की राहत: इसके बदले में अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए 25 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये) को रिलीज करेगा।

तेल प्रतिबंधों में ढील: ईरान पर लगे कड़े आर्थिक और तेल प्रतिबंधों को हटाया जाएगा, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से तेल बेच सकेगा।

ईरान में क्यों छिड़ा गृहयुद्ध? सरकार और सेना आमने-सामने

इस समझौते के बाद ईरान दो गुटों में बंट गया है:

 राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (सरकार): सरकार का तर्क है कि देश की भुखमरी और डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह समझौता बेहद जरूरी था। 25 अरब डॉलर मिलने से ईरान की जनता को बड़ी राहत मिलेगी।

 इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC – सेना): ईरान की सेना और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खमेनेई के कट्टरपंथी समर्थक इस डील से आगबबूला हैं। सेना का कहना है कि परमाणु हथियार बनाने की क्षमता ही अमेरिका के खिलाफ ईरान की सबसे बड़ी ढाल थी, जिसे राष्ट्रपति ने आसानी से गंवा दिया।

होर्मुज स्ट्रेट पर सस्पेंस: ईरान की सेना ने पहले धमकी दी थी कि वे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरू मध्य’ को बंद कर देंगे। राष्ट्रपति ने वादा किया है कि रास्ता खुला रहेगा, लेकिन सेना अभी भी वहां से हटने को तैयार नहीं है।

इजरायल भड़का, लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले शुरू

इस डील से अमेरिका का सबसे पक्का दोस्त इजरायल बेहद नाराज है। इजरायल का मानना है कि इस समझौते से ईरान को सिर्फ आर्थिक मजबूती मिलेगी, जिससे वह भविष्य में और खतरनाक हो जाएगा। अपनी इसी नाराजगी को जताते हुए इजरायली सेना (IDF) ने डील के 24 घंटे के भीतर ही दक्षिण लेबनान के जवतार, मरकबा और खियाम शहरों पर भारी हवाई हमले और गोलाबारी शुरू कर दी है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खुशखबरी?

अगर यह शांति समझौता जमीन पर कामयाब रहता है, तो भारत के लिए इसके दो बड़े फायदे होंगे:

 सस्ता कच्चा तेल: ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतें स्थिर होंगी, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में रहेंगे।

 सुरक्षित व्यापार: मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों से होने वाला भारतीय व्यापार अब बिना किसी युद्ध के डर के सुरक्षित तरीके से हो सकेगा।

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