नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्राइल दौरे से लौटते ही मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध भड़क गया है। इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद, भारतीय राजनीति में भी सरगर्मी तेज हो गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम और विशेषकर हमलों की ‘टाइमिंग’ को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं।

ओवैसी ने युद्ध के इन हालातों के बीच खाड़ी देशों में फंसे हज़ारों भारतीयों की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

हमले की टाइमिंग पर ओवैसी के गंभीर सवाल

प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय इस्राइल यात्रा के तुरंत बाद हुए इन हमलों ने कई भू-राजनीतिक (geopolitical) सवाल खड़े कर दिए हैं। ओवैसी ने सरकार से सीधे सवाल किए:

क्या भारत को पहले से थी जानकारी?: ओवैसी ने पूछा कि पीएम मोदी के इस्राइल से निकलते ही ईरान पर हमले शुरू हो गए। क्या भारत सरकार या प्रधानमंत्री को इस हमले और इसके समय की पहले से कोई खुफिया जानकारी थी?

• कूटनीतिक संदेश पर चिंता: उन्होंने कहा कि इस हमले से ठीक पहले पीएम मोदी का इस्राइल में होना, खाड़ी देशों और वहां रहने वाले भारतीयों के लिए क्या कूटनीतिक संदेश देता है, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए।

“60,000 भारतीयों की जान खतरे में”

असदुद्दीन ओवैसी के बयान का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा से जुड़ा था। उन्होंने सरकार की निकासी (Evacuation) रणनीति पर जवाब मांगा:

• आंकड़ों का हवाला: ओवैसी ने बताया कि वर्तमान में लगभग 50,000 भारतीय ईरान में और करीब 10,000 भारतीय इस्राइल में रहकर काम कर रहे हैं।

• निकासी का प्लान (Evacuation Plan) क्या है?: उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा है कि इन युद्ध जैसे हालातों के बीच, इन 60,000 भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के लिए क्या ‘कंटिंजेंसी प्लान’ (आपातकालीन योजना) तैयार किया गया है?

विदेश मंत्रालय (MEA) की एडवाइज़री और सरकार का रुख

ओवैसी के सवालों और विपक्ष के दबाव के बीच, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए हैं:

• ट्रैवल एडवाइज़री जारी: विदेश मंत्रालय ने अगली सूचना तक ईरान और इस्राइल की सभी गैर-ज़रूरी यात्राओं (Non-essential travel) से बचने की सख्त सलाह दी है। कमर्शियल उड़ानों के रद्द होने के कारण नागरिकों को अलर्ट पर रखा गया है।

हेल्पलाइन और रजिस्ट्रेशन: तेहरान (ईरान) और तेल अवीव (इस्राइल) स्थित भारतीय दूतावासों ने 24/7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर एक्टिव कर दिए हैं। सभी भारतीयों से तुरंत दूतावास के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की गई है।

• सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील: जो भारतीय नागरिक पहले से इन देशों में हैं, उन्हें अपनी आवाजाही सीमित रखने और सुरक्षित बंकरों या शेल्टर के आसपास ही रहने को कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक, हालात बिगड़ने पर सरकार पूर्व में चलाए गए अभियानों (‘ऑपरेशन अजय’ या ‘ऑपरेशन गंगा’) की तर्ज पर सुरक्षित निकासी के लिए भी ब्लूप्रिंट तैयार रख रही है।

परमाणु होड़ और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन

घरेलू राजनीति के साथ-साथ ओवैसी ने वैश्विक मंच पर भी इस्राइल की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हुए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों, यूएन चार्टर और एनपीटी (NPT) का सीधा उल्लंघन बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इन हमलों के बाद अरब देशों में भी असुरक्षा की भावना पैदा होगी, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियार बनाने की एक खतरनाक रेस (Nuclear arms race) शुरू हो सकती है।

निष्कर्ष:

एक तरफ जहां सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम और कूटनीतिक टाइमिंग को लेकर सरकार को घेरने में लगा है। आने वाले दिनों में भारत का विदेश मंत्रालय इस संकट से कैसे निपटता है, यह भारत की कूटनीतिक क्षमता का एक बड़ा इम्तिहान होगा।

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