रायसेन: जिले के कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पर कीट और रोगों का असर दिखने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। सफेद मक्खी के कारण पीला मोजेक रोग और तना मक्खी के प्रकोप से पौधे पीले होकर सूख रहे हैं। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा के निर्देश पर कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिकों के संयुक्त निगरानी दल का गठन किया गया है। यह दल सीधे खेतों में पहुंचकर फसलों का निरीक्षण कर रहा है और किसानों को बचाव के तकनीकी उपाय बता रहा है। इसी क्रम में कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों की टीम ने गैरतगंज विकासखण्ड के ग्राम सहजपुर, आलमपुर और पापड़ा का दौरा किया। इस दौरान उपसंचालक कृषि श्री के.पी. भगत, वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार द्विवेदी, सहायक संचालक कृषि श्री के.के. ठाकुर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी डॉ. गोविन्द नामदेव और कृषि विस्तार अधिकारी श्री अरूण अहिरवार ने किसानों के खेतों में जाकर फसलों की स्थिति देखी। अधिकारियों ने किसान चंद्रेष राजपूत, नीरज राजपूत, चैन सिंह यादव, रिजबान अहमद सहित अन्य किसानों से चर्चा कर उन्हें फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय सुझाए। कीट और रोगों की रोकथाम के लिए वैज्ञानिकों की सलाह कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल सुरक्षा के लिए निम्नलिखित रासायनिक व जैविक उपाय तुरंत अपनाने की सलाह दी है: पीला मोजेक रोग की रोकथाम: शुरुआती अवस्था में ही रोग से ग्रसित पौधों को खेत से उखाड़कर तुरंत नष्ट कर दें। सफेद मक्खी को आकर्षित कर खत्म करने के लिए खेत में पीले चिपचिपे ट्रैप (Yellow Sticky Traps) लगाएं। सफेद मक्खी के रासायनिक नियंत्रण के लिए बीटासायफ्लुथ्रिन 8.49% + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% OD की 350 मिली प्रति हेक्टेयर या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 9.5% ZC + थायमिथोक्साम 12.6% की 200 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। तना मक्खी (Stem Fly) का नियंत्रण: क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल + लैम्डासायलोथ्रिन 200 मिली प्रति हेक्टेयर, आइसोसायक्लोसेरम 600 मिली प्रति हेक्टेयर या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 47.85% SC 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। अन्य प्रमुख फफूंदजनित रोगों से बचाव: राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट: फ्लक्जापाइरॉक्साइड + पाइरोक्लोस्ट्रोबिन 300 मिली प्रति हेक्टेयर। एन्थ्रेक्नोज रोग: टेबुकोनाजोल + सल्फर 1250 ग्राम प्रति हेक्टेयर। कॉलर रॉट व चारकोल रॉट: कार्बेंडाजिम + मैंकोजेब 1250 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपने खेतों की निगरानी करें और किसी भी कीट या रोग के लक्षण दिखने पर तुरंत बताए गए उपायों को अपनाएं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation भोपाल: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की तो सीधे होगी जेल, पुलिस कमिश्नर ने जारी किया कड़ा आदेश सागर में जहरीली शराब कांड के बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: सीनियर IPS इरशाद वली बने सागर जोन के नए आईजी