नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं को दिल्ली पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 20 जुलाई 2026 को प्रस्तावित ‘जंतर-मंतर से संसद चलो’ अभियान से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई को लेकर अब सरकार की मंशा पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। मानसून सत्र की शुरुआत और टाइमिंग पर उठे सवाल दिलचस्प बात यह है कि 20 जुलाई 2026 से ही संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) भी शुरू हो रहा है, जो 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस सत्र को मंजूरी दे दी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सत्र के पहले ही दिन संसद के घेराव और बड़े राजनीतिक ड्रामे से बचने के लिए सरकार ने आनन-फानन में यह कार्रवाई की है, ताकि विपक्ष को इस मुद्दे पर तुरंत और मजबूत जमीन न मिल सके। विपक्ष और समर्थकों का आरोप: ‘आंदोलन से डरी सरकार’ सोनम वांगचुक के समर्थकों और विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार 20 जुलाई को होने वाले विशाल ‘संसद चलो’ मार्च और संसद सत्र की टाइमिंग से पूरी तरह असहज थी। आरोप लगाया जा रहा है कि संसद के करीब होने वाले इस शांतिपूर्ण मार्च के प्रभाव को दबाने और जनता की आवाज को रोकने के लिए ही पुलिस ने उन्हें जबरन धरना स्थल से उठा लिया। विपक्ष इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला बता रहा है। प्रशासन का तर्क: स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से उठाया कदम दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी डर या राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से मानवीय और कानूनी आधार पर की गई है। अधिकारियों के मुताबिक: सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर थे, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहद नाजुक दौर में पहुंच गया था। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर में पानी और आवश्यक तत्वों की भारी कमी हो गई थी, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता था। दिल्ली हाई कोर्ट के उस निर्देश का हवाला दिया गया है, जिसमें किसी भी नागरिक की जान बचाने और उनके स्वास्थ्य की दैनिक निगरानी करने की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी गई है। अस्पताल में भी अनशन जारी, सत्र रहेगा हंगामेदार फिलहाल सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रही है। हालांकि, अस्पताल के बेड से भी उन्होंने अपना अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया है। अब जब 20 जुलाई से संसद का सत्र शुरू हो रहा है, तो राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को सदन के भीतर ज़ोर-शोर से उठाएगा, जिससे मानसून सत्र की शुरुआत बेहद हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation अहमदाबाद ब्लास्ट विशेष: आखिर क्यों हमेशा के लिए बंद नहीं कर दी जातीं ये ‘जहर की फैक्ट्रियां’? जानिए इसके पीछे का कड़वा सच संसद की कार्यवाही फिर स्थगित: अंदर विपक्ष का भारी हंगामा, बाहर CJP का जोरदार प्रदर्शन