पूरी दुनिया इस समय जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रही है। भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे ठंडे माने जाने वाले महाद्वीप ‘यूरोप’ में भी इस समय भीषण गर्मी और लू (Heatwave) ने हाहाकार मचा रखा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई देशों में रेड अलर्ट जारी करना पड़ा है और लू के कारण लोगों की जान जा रही है। आइए जानते हैं कि दुनिया के किन देशों में इस समय स्थिति सबसे ज्यादा खराब है और आखिर यूरोप में अचानक इतनी गर्मी क्यों बढ़ने लगी है। किन देशों में लू (Heatwave) ले रही है मासूमों की जान? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल गर्मी ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वर्तमान में कई देश इसकी चपेट में हैं: यूरोप के देश: दक्षिणी यूरोप के Greece (ग्रीस), Italy (इटली), Spain (स्पेन), और Cyprus (साइप्रस) में पारा 40°C से 45°C के पार पहुंच गया है। ग्रीस और साइप्रस में भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन के कारण कई विदेशी पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। सऊदी अरब (Saudi Arabia): इस साल मक्का में हज यात्रा के दौरान तापमान 51.8°C तक दर्ज किया गया। इस भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण 1,000 से अधिक हाजियों की मौत की दर्दनाक खबर सामने आई है। एशिया और अफ्रीका: भारत और पाकिस्तान सहित उत्तर अफ्रीकी देश जैसे अल्जीरिया और मिस्र (Egypt) में भी लू के कारण स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। आखिर ठंडा रहने वाला यूरोप अब क्यों ‘उबल’ रहा है? यूरोप को हमेशा से अपने सुहावने और ठंडे मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन अब वहां की स्थिति बदल चुकी है। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे 3 बड़े कारण बताए हैं: 1. दुनिया के मुकाबले दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा यूरोप ‘वर्ल्ड मीटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन’ (WMO) की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप बाकी दुनिया के मुकाबले 2 गुनी तेजी से गर्म हो रहा है। ग्रीनहाउस गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण यूरोप का वायुमंडल गर्म हवाओं को सोख रहा है। 2. ‘हीट डोम’ (Heat Dome) का जानलेवा जाल यूरोप के आसमान में इस समय ‘हीट डोम’ की स्थिति बनी हुई है। जब किसी इलाके के ऊपर हाई प्रेशर (उच्च दबाव) का क्षेत्र बनता है, तो वह गर्म हवा को एक जगह पर बिल्कुल लॉक कर देता है। यह एक गर्म ढक्कन की तरह काम करता है, जिससे अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं यूरोप के ऊपर ही फंस गई हैं। 3. कमजोर पड़ती ‘जेट स्ट्रीम’ धरती के ऊपर चलने वाली ठंडी हवाओं की तेज पट्टी, जिसे जेट स्ट्रीम कहा जाता है, ग्लोबल वार्मिंग के कारण कमजोर पड़ गई है। इसके कमजोर होने से गर्म हवाएं आसानी से उत्तर दिशा (यूरोप) की तरफ बढ़ रही हैं और महीनों तक एक ही जगह थमी हुई हैं। वैज्ञानिकों की चेतावनी: अभी तो बस शुरुआत है! जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण को तुरंत नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में गर्मियां और भी लंबी, जानलेवा और भयानक हो जाएंगी। अब समय आ गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ पूरी दुनिया मिलकर कड़े कदम उठाए। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation NEET पेपर लीक: दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का बड़ा प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े आंदोलनकारी, पुलिस अलर्ट राम मंदिर दान जांच: जानिए क्यों ‘एंड’ तक सार्वजनिक नहीं हो सकती SIT रिपोर्ट, क्या है कानूनी मजबूरी?