नई दिल्ली/ढाका: क्या ड्रैगन ने भारत को चारों तरफ से घेरने का अपना सबसे खतरनाक चक्रव्यूह पूरा कर लिया है? यह सवाल इन दिनों भारत के सुरक्षा गलियारों में गूंज रहा है। चीन ने चुपके से भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के समंदर में एक ऐसा ठिकाना बना लिया है, जो सीधे तौर पर नई दिल्ली को चुनौती दे रहा है। हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बने ‘बीएनएस शेख हसीना’ सबमरीन बेस और मोंगला पोर्ट पर चीन के बढ़ते कब्जे की। भले ही बांग्लादेश इसे अपना प्रोजेक्ट कहे, लेकिन इसके पीछे का पैसा, दिमाग और तकनीक पूरी तरह चीन की है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि चीन की इस ‘समंदर वाली चाल’ से 140 करोड़ भारतीयों और देश की सुरक्षा को क्या सीधा खतरा है। तारीखों की जुबानी: कैसे बुना गया यह जाल? 2019 (साजिश की शुरुआत): बांग्लादेश ने चीन की एक सरकारी कंपनी के साथ मिलकर एक बेहद आधुनिक नेवल सबमरीन बेस (पनडुब्बी ठिकाना) बनाने की सीक्रेट डील की। 2023 (ड्रैगन की एंट्री): मार्च 2023 में इस बेस का उद्घाटन हुआ। चीन ने इसे बनाने में अरबों रुपये पानी की तरह बहाए। 2024 से 2026 (घेराबंदी मजबूत): अब चीन मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण के नाम पर वहां अपने पैर पूरी तरह जमा चुका है। क्यों है यह डील भारत के लिए ‘खतरे की घंटी’? (4 बड़े कारण) 1. भारत के ‘चिकन नेक’ पर सीधी नजर नक्शे पर देखें तो पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन नेक’ कहते हैं) भारत का सबसे नाजुक हिस्सा है। यह सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर चौड़ी जमीन की एक पट्टी है, जो पूरे उत्तर-पूर्व (असम, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल) को मुख्य भारत से जोड़ती है। सीधा खतरा: बांग्लादेश के इन पोर्ट्स पर बैठकर चीन की सेना हमारे इस ‘चिकन नेक’ के बिल्कुल करीब पहुंच गई है। युद्ध की स्थिति में चीन यहाँ से उत्तर-पूर्व के राज्यों को भारत से काटने की हिमाकत कर सकता है। 2. हमारी परमाणु पनडुब्बियों की जासूसी आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना का सबसे महत्वपूर्ण ईस्टर्न नेवल कमांड है। यहीं हमारी परमाणु पनडुब्बियां (जैसे INS अरिहंत) तैनात रहती हैं। इसके पास ही उड़ीसा का ‘व्हीलर द्वीप’ है, जहां से भारत अपनी अग्नि और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों का टेस्ट करता है। 3. ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) का आखिरी मनका चीन की एक घोषित नीति है—भारत को समंदर में चारों तरफ से घेर लेना। पश्चिम में पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट चीन के पास है। दक्षिण में श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट चीन ने 99 साल की लीज पर ले रखा है। पूर्व में म्यांमार का क्युएकफ्यू पोर्ट चीन विकसित कर रहा है। और अब बांग्लादेश का मोंगला और कॉक्स बाजार बेस लेकर चीन ने भारत के चारों तरफ अपनी ‘मोतियों की माला’ यानी घेराबंदी पूरी कर ली है। 4. आम जनता की जेब और व्यापार पर चोट बंगाल की खाड़ी भारत के व्यापार के लिए लाइफलाइन (जीवनरेखा) है। हमारे देश का करोड़ों का बिजनेस इसी समुद्री रास्ते से होता है। सीधा खतरा: अगर इस इलाके में चीनी नौसेना की दादागिरी बढ़ती है, तो कल को भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा होगा। समंदर में तनाव बढ़ने से माल ढुलाई (Freight Charges) महंगी होगी, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और हर आयातित सामान के दाम बढ़ जाएंगे। यानी सुरक्षा का यह खतरा सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालेगा। क्या भारत का कोई प्लान है ? भारतीय कूटनीति भी इस खतरे को भांप चुकी है। भारत के कड़े रुख के कारण ही बांग्लादेश को अपना सोनदिया डीप सी पोर्ट प्रोजेक्ट कैंसिल करना पड़ा था, जिसे चीन हड़पना चाहता था। इसके अलावा, भारत अब अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर अपनी सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ा रहा है ताकि चीन की किसी भी हिमाकत का समंदर के बीच में ही दम निकाला जा सके। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता। भले ही बांग्लादेश हमारा मित्र है, लेकिन उसकी जमीन और समंदर का इस्तेमाल करके चीन जो चालें चल रहा है, उसपर भारत को बाज जैसी नजर रखनी होगी। यह सिर्फ सीमाओं का विवाद नहीं, बल्कि देश की अखंडता का सवाल है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation दिल्ली-NCR, जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में भूकंप के तेज झटके, हिंदू कुश था केंद्र “सुनील शेट्टी भी बने अंधभक्त ?”15 महीने की नातिन पर किए दावे के बाद इंटरनेट पर उड़ी धज्जियां, लोग बोले- फेंकने की भी हद होती है!