दतिया। मध्य प्रदेश की सबसे हॉट सीट मानी जा रही दतिया विधानसभा उपचुनाव की वोटिंग खत्म होने के बाद अब नतीजों को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। जहां एक तरफ कांग्रेस इस चुनाव में अपनी जीत का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी अपने मजबूत संगठन और सत्ता के दम पर पलटवार के लिए पूरी तरह आश्वस्त है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और कड़ा हो चुका है, जहां दोनों ही पार्टियों के लिए शह और मात के अपने-अपने समीकरण हैं। दोनों पक्षों के वो मुख्य समीकरण, जो दतिया का परिणाम तय करेंगे: 1. कांग्रेस का पक्ष: क्यों मजबूत दिख रही है उम्मीदें? अनुभवी चेहरा और लोकल कनेक्ट: कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह इस क्षेत्र के पुराने और मंझे हुए खिलाड़ी हैं। 7वीं बार चुनाव लड़ रहे घनश्याम सिंह का ग्रामीण क्षेत्रों में एक मजबूत और वफादार वोट बैंक माना जाता है, जो कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। विपक्ष की एकजुटता: इस बार समाजवादी पार्टी (SP) ने अपना उम्मीदवार न उतारकर कांग्रेस को खुला समर्थन दिया है। इससे विपक्ष के वोटों का बिखराव रुका है और सत्ता विरोधी वोट एकमुश्त कांग्रेस के पाले में लामबंद होते दिखे हैं। 2. बीजेपी का संकट: क्या आंतरिक कलह पड़ेगी भारी? भीतरघात का खतरा: पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के एक धड़े में नाराजगी खुलकर सामने आई थी। हालांकि, पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश की, लेकिन दतिया की सियासी गलियों में चर्चा है कि यदि परिणाम बीजेपी के विपरीत आते हैं, तो इसका सीधा ठीकरा और गाज पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर गिरना तय है। हाईकमान इसे उनकी डैमेज कंट्रोल की नाकामी के रूप में देख सकता है। 3. बीजेपी का पक्ष: संगठन और सत्ता की ताकत बूथ मैनेजमेंट और नया चेहरा: बीजेपी इस बात को लेकर आश्वस्त है कि आशुतोष तिवारी के रूप में उन्होंने एक बेदाग और नया चेहरा दिया है, जिससे एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) कम हुई है। नरोत्तम मिश्रा का प्रतिष्ठा दांव पर: भले ही नरोत्तम मिश्रा खुद चुनाव नहीं लड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। बीजेपी का मजबूत पन्ना प्रमुख नेटवर्क और अंतिम समय का बूथ मैनेजमेंट कांग्रेस के समीकरणों को बिगाड़ने की पूरी क्षमता रखता है। दतिया की जमीनी हकीकत बताती है कि मुकाबला 50-50 की स्थिति में आकर रुक गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस गुटबाजी और स्थानीय मुद्दों के सहारे अपनी किस्मत खुलने की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं बीजेपी अपने कैडर और विकास कार्यों के दम पर गढ़ बचाने का दावा कर रही है ! अब सभी की नजरें 3 अगस्त पर टिकी हैं, जब EVM खुलते ही साफ होगा कि जनता ने कांग्रेस के ‘हाथ’ को चुना है या बीजेपी के ‘कमल’ पर भरोसा बरकरार रखा है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation MP Weather Red Alert: मध्य प्रदेश के 20 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग में हड़कंप: 166 तबादलों पर लगी रोक, मंत्री की छुट्टी के बाद अब पीएस भी रिटायर