भोपाल: मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विभाग में क्लास-2 अधिकारियों के 166 तबादलों में बड़ी गड़बड़ी और सौदेबाजी की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने सभी ट्रांसफर आदेशों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। जून 2026 में विभाग के भीतर प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर ट्रांसफर किए गए थे। इनमें पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के तबादले शामिल थे। इन तबादलों की सूचियां जारी होते ही गंभीर शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचने लगीं। आरोपों के अनुसार, इन ट्रांसफर के पीछे बड़ी सौदेबाजी की गई थी। हैरानी की बात यह है कि 31 जुलाई 2026 को जब विभाग के प्रमुख सचिव (PS) उमाकांत उमराव सेवानिवृत्त (Retire) हो रहे थे, ठीक उसी दिन इन विवादित तबादला आदेशों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। इस कार्रवाई के बाद से पूरे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। कई अधिकारियों ने मांग की है कि इन गलत तबादलों को पूरी तरह निरस्त किया जाए। सरकार ने जिन दो मुख्य ट्रांसफर ऑर्डर्स पर रोक लगाई है, उनका विवरण इस प्रकार है: 1. पहला आदेश: एफ नंबर/ 1/1/4/00006/ 2026 सेक्रेटरी-35 एनएएच 15 जून 2026 (इसमें 91 अधिकारियों के ट्रांसफर थे)। 2. दूसरा आदेश: एफ नंबर/ 1/1/4/00005/ 2026 सेक्रेटरी-35 एनएएच 15 जून 2026 (इसमें 75 अधिकारियों के ट्रांसफर थे)। बता दें कि सरकार ने 1 जून से 15 जून के बीच से तबादलों से प्रतिबंध हटाया था और इसी का फायदा उठाकर आखिरी दिन यह 166 ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए गए थे। मंत्री की पहले ही हो चुकी है छुट्टी पशुपालन विभाग पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में घिरा हुआ है। जमीन आवंटन में कथित सौदेबाजी के आरोपों के बाद, 14 जुलाई को मुख्यमंत्री ने पशुपालन मंत्री लखन पटेल से यह विभाग वापस ले लिया था। मंत्री को हटाए जाने के ठीक 18 दिन बाद अब ट्रांसफर स्कैम का यह नया मामला सामने आया है। विभाग के पुराने विवाद यह पहली बार नहीं है जब यह विभाग चर्चा में आया है। इससे पहले भी विभाग कई वजहों से विवादों में रहा है: गौशाला नीति में गड़बड़ी: स्वावलंबी गौशाला नीति-2025 के तहत प्रस्तावित 14 गौशालाओं में से केवल 7 के टेंडर और 4 की एलओआई (LOI) जारी करने में भ्रष्टाचार की शिकायतें दिल्ली तक पहुंची थीं। डेयरी परियोजना पर ब्रेक: एनडीडीबी (NDDB) की 1500 करोड़ रुपये की मेगा डेयरी परियोजना भी आगे नहीं बढ़ सकी है। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी डेयरी संघ और 6 दुग्ध संघों का मैनेजमेंट एनडीडीबी को सौंपने का फैसला लंबे समय से अटका हुआ है। अब देखना यह होगा कि सरकार की इस उच्च स्तरीय जांच में क्या बड़े खुलासे होते हैं और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation दतिया उपचुनाव: बंपर वोटिंग के बाद कड़ा मुकाबला, क्या कांग्रेस मारेगी बाजी या गुटबाजी से उबरकर बीजेपी बचाएगी अपना गढ़? रायसेन: आवारा पशुओं को हटाने के लिए नगरपालिका ने तय की ड्यूटी; ये हैं जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों के नंबर, काम न होने पर नागरिक बनाएं वीडियो