नई दिल्ली: देश में जब भी किसी बड़ी संस्था या एनजीओ (NGO) पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते हैं, तो एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आता है— FCRA। खबरों में अक्सर सुनने को मिलता है कि फलां संस्था का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया या सस्पेंड हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह FCRA आखिर है क्या और देश की सुरक्षा से इसका क्या कनेक्शन है? आइए आज इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं। FCRA क्या है? (What is FCRA Law) FCRA का पूरा नाम Foreign Contribution Regulation Act है। हिंदी में इसे ‘विदेशी अंशदान (नियमन) अधिनियम’ कहा जाता है। यह भारत सरकार का एक बेहद मजबूत और कड़ा कानून है, जो विदेशों से आने वाले दान या चंदे (Foreign Funding) को रेगुलेट और कंट्रोल करता है। यह कानून गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के तहत काम करता है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत में मौजूद कोई भी संस्था, ट्रस्ट या एनजीओ बिना सरकार की जानकारी और अनुमति के विदेशों से पैसा नहीं ले सकती। क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत? भारत में हजारों ऐसे संगठन हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और गरीबों की मदद के लिए काम करते हैं। इन कामों के लिए उन्हें विदेशों से भी डोनेशन मिलता है। सरकार इस डोनेशन के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी पैसे का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ सही कामों के लिए हो। सुरक्षा सबसे पहले: सरकार को यह डर रहता है कि कोई विदेशी ताकत या असामाजिक तत्व भारत के किसी संगठन को फंडिंग देकर देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान न पहुंचाए, यहां का माहौल न बिगाड़े या देश की राजनीति को प्रभावित न करे। इसी खतरे को रोकने के लिए यह कानून एक कवच की तरह काम करता है। FCRA के 3 सबसे कड़े और जरूरी नियम अगर कोई संस्था विदेशों से चंदा लेना चाहती है, तो उसे इन कड़े नियमों का पालन करना ही पड़ता है: 1. लाइसेंस लेना अनिवार्य: विदेश से ₹1 भी चंदा लेने से पहले संस्था को गृह मंत्रालय से FCRA रजिस्ट्रेशन कराना होता है। यह लाइसेंस 5 साल के लिए मिलता है, जिसे बाद में रिन्यू कराना पड़ता है। 2. SBI में ही खुलेगा खाता: नियमों के मुताबिक, विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए संस्थाओं को सिर्फ और सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), नई दिल्ली मुख्य शाखा में ही अपना खाता खोलना होता है। किसी दूसरे बैंक में सीधे विदेशी पैसा नहीं आ सकता। 3. पाई-पाई का हिसाब: संस्था को हर साल सरकार को ऑडिट रिपोर्ट देनी होती है कि विदेश से कितना पैसा आया, किसने भेजा और उसे कहाँ-कहाँ खर्च किया गया। देश की व्यवस्था में बाहरी दखलंदाजी को रोकने के लिए FCRA के तहत कुछ लोगों को विदेशी चंदा लेने की सख्त मनाही है: इन लोगों पर है पूरी तरह से रोक – चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार सांसद, विधायक या राजनीतिक पार्टियां सरकारी कर्मचारी, अधिकारी और जज पत्रकार, न्यूज चैनल और अखबार के प्रकाशक (Publishers) देखा जाए तो FCRA कानून किसी भी सही काम करने वाली संस्था को नहीं रोकता। इसका असली मकसद व्यवस्था में पारदर्शिता (Transparency) लाना और देश की संप्रभुता की रक्षा करना है। जब तक विदेशी पैसे का इस्तेमाल देश के विकास और समाज सेवा के लिए हो रहा है, तब तक नियमों का पालन करने वाली संस्थाओं के लिए कोई परेशानी नहीं होती। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation CJP के विरोध प्रदर्शन की बड़ी जीत: पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा रायसेन में शिक्षा का दोहरा चेहरा: सांची-गैरतगंज को मिली नई बिल्डिंग, सिलवानी में भवन लगभग तैयार,जगह को तरस रहे बच्चे।