भोपाल/मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारी हंगामे और विपक्ष के कड़े विरोध के बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को ध्वनि मत (Voice Vote) से पास कर दिया गया है। उत्तराखंड और अन्य कुछ राज्यों के बाद, मध्य प्रदेश अब देश का ऐसा प्रमुख राज्य बन गया है जो UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

‘राम, रहीम, रॉबिन सबको मिलेंगे बराबर अधिकार’ – सीएम मोहन यादव

विधेयक पास होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे प्रदेश के इतिहास का एक “स्वर्णिम अध्याय” बताया। उन्होंने कहा,

“यह कानून डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक देश, एक संविधान’ के सपने को पूरा करता है। अब समाज में चाहे कोई राम हो, रहीम हो, रविंदर हो या रॉबिन, सबको एक समान अधिकार मिलेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति के कारण इस कानून का विरोध कर रहा था, जबकि यह कानून माताओं-बहनों को उनका हक दिलाने और उन्हें अत्याचार से बचाने के लिए लाया गया है।

इस नए कानून की 5 सबसे बड़ी और दमदार बातें:

1. बहुविवाह और निकाह हलाला पर पूरी रोक: कानून के लागू होते ही राज्य में कोई भी व्यक्ति एक से अधिक शादी नहीं कर पाएगा। साथ ही ‘निकाह हलाला’ जैसी कुप्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है और इसे दंडनीय अपराध माना गया है।

2. लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी: राज्य में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को 1 महीने के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। अगर पार्टनर की उम्र 21 साल से कम है, तो इसकी जानकारी उनके माता-पिता को दी जाएगी। लिव-इन से पैदा होने वाले बच्चों को भी पूरा कानूनी और संपत्ति का अधिकार मिलेगा।

3. बेटे-बेटियों को संपत्ति में बराबर का हक: नए कानून के तहत अब पैतृक संपत्ति में बेटों और बेटियों (चाहे वे शादीशुदा हों या नहीं) को एक समान अधिकार मिलेगा।

4. विवाह और तलाक का सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन: सभी धर्मों और समुदायों के लिए शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन सरकारी पोर्टल पर कराना अनिवार्य होगा। अब कोई भी मौखिक या अनौपचारिक पंचायत के जरिए तलाक नहीं दे सकेगा।

5. आदिवासी समाज को छूट: मध्य प्रदेश की बड़ी जनजातीय (Tribal) आबादी की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

मानसून सत्र के दूसरे दिन जब यह बिल चर्चा के लिए लाया गया, तो कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। विपक्ष की मांग थी कि इस बिल को पहले ‘सलेक्ट कमेटी’ (प्रवर समिति) के पास जांच के लिए भेजा जाए। हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित भी करनी पड़ी। लेकिन सरकार के कड़े रुख के आगे विपक्ष की एक न चली और बिल को बहुमत से पास कर दिया गया।

अब इस ऐतिहासिक विधेयक को अंतिम मंजूरी के लिए आगे भेजा जा रहा है, जिसके बाद यह पूरे मध्य प्रदेश में कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

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