नई दिल्ली/वाशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में क्या कोई किसी का पक्का दोस्त होता है? यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। खुद को भारत का सबसे अच्छा दोस्त बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे भारत के व्यापारिक हितों को बड़ा झटका लग सकता है। अमेरिका में एक नया ‘रूस सेंक्शन्स बिल’ (Russia Sanctions Bill) पेश किया गया है, जिसे ट्रंप का भी समर्थन हासिल है। इस बिल के तहत रूस से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने वाले देशों पर भारी-भरकम टैक्स यानी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है, और इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है।

इस कदम के बाद सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक गलियारों में एक ही चर्चा है— “अगर ट्रंप भारत को अपना दोस्त मानते हैं, तो फिर दुश्मनी जैसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं?”

क्या है 100% का गणित?

अमेरिका के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किए गए इस बिल को अब अमेरिकी सीनेट में दोनों पार्टियों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट) का समर्थन मिल रहा है।

 पहले 500% टैक्स की थी तैयारी: शुरुआत में इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का भारी टैक्स लगाने का प्रस्ताव था।

 अब 100% टैक्स का खतरा: भारी विरोध के बाद इस टैक्स को घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है।

 निशाने पर भारत समेत 5 देश: यह नया कानून दुनिया के उन टॉप 5 देशों को टारगेट करता है जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदते हैं। इन देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान शामिल हैं।

फ्रेंड ऑफ इंडिया’ कहने वाले ट्रंप का यह कैसा रूप?

डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘पक्का दोस्त’ और भारत को अमेरिका का ‘महान मित्र’ बता चुके हैं। लेकिन जब बात व्यापार और ग्लोबल पॉलिटिक्स की आती है, तो ट्रंप की नीति पूरी तरह बदल जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे 3 बड़े कारण हैं:

1. “अमेरिका फर्स्ट” की ज़िद

ट्रंप की राजनीति का सबसे बड़ा मंत्र है ‘America First’ (पहले अमेरिका)। उनके लिए अमेरिकी कंपनियों का मुनाफा और अमेरिका की अर्थव्यवस्था सबसे ऊपर है। जब उनके अपने देश के हितों की बात आती है, तो वह दोस्ती को किनारे रखने में देर नहीं लगाते।

2. रूस को आर्थिक रूप से तोड़ना

यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका लगातार रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहता है। रूस की सबसे बड़ी कमाई तेल और गैस बेचकर होती है। चूंकि भारत और चीन मिलकर रूस के तेल का एक बड़ा हिस्सा खरीदते हैं, इसलिए अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है ताकि रूस की कमाई का यह रास्ता बंद हो सके।

3. दबाव बनाने की रणनीति (Pressure Tactics)

अमेरिका इस बिल के जरिए भारत को डराकर अपनी शर्तों पर ट्रेड डील (व्यापार समझौता) साइन कराना चाहता है। भारत को मिलने वाली अमेरिकी छूट 24 जुलाई को खत्म हो रही है, ऐसे में यह बिल भारत पर दबाव बनाने का एक बड़ा जरिया बन गया है।

भारत का अगला कदम क्या होगा?

भारतीय राजनयिकों का साफ कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से कोई समझौता नहीं करेगा। भारत को अपने 140 करोड़ नागरिकों के लिए सस्ते तेल की जरूरत है, जो इस समय रूस से मिल रहा है।

राहत की बात यह है कि इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार (Waiver Power) दिया गया है कि वह चाहें तो किसी देश को इस टैक्स से छूट दे सकते हैं। अब देखना यह होगा कि ट्रंप अपनी ‘दोस्ती’ निभाते हुए भारत को इस टैक्स से बचाते हैं, या फिर ‘दुश्मनी’ भरा यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा।

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