नई दिल्ली: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उबाल आ गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने वाले 6 राज्यसभा सांसदों की सदस्यता खत्म करने की अपील की है।

सीएम मान ने राष्ट्रपति को पार्टी के सभी विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन (मेमोरेंडम) सौंपा। जब वह राष्ट्रपति भवन में अकेले मिले, उस दौरान उनके 90 विधायक रेल भवन के पास उनका इंतजार कर रहे थे। मान ने कड़े शब्दों में कहा कि इस तरह पार्टी छोड़कर जाना संविधान का सीधा मजाक उड़ाना और उसकी हत्या करने जैसा है।

राइट टू रिकॉल’ (Right to Recall) की उठी मांग:

इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री मान ने ‘राइट टू रिकॉल’ का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि अगर कोई चुना हुआ जनप्रतिनिधि जनता के भरोसे पर खरा नहीं उतरता है, तो आम जनता के पास उसे वापस बुलाने (यानी पद से हटाने) का विकल्प जरूर होना चाहिए।

राघव चड्ढा ने भी रखा अपना पक्ष:

इस पूरे विवाद के बीच, राघव चड्ढा ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी बात रखी है। राघव ने दावा किया है कि उनके खिलाफ भी झूठे केस दर्ज करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि बदले की भावना से की जाने वाली राजनीति लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। राघव ने तंज कसते हुए कहा कि AAP के पास केवल 1 राज्य है, जबकि BJP 21 राज्यों की सत्ता में है।

धमकी बर्दाश्त नहीं करेंगे पंजाबी:

सीएम भगवंत मान ने आरोप लगाया कि उन्हें यह कहकर धमकाया जा रहा है कि उनके (विपक्ष के) पास 21 राज्यों की पुलिस की ताकत है, जबकि AAP के पास सिर्फ 1 राज्य की पुलिस है। मान ने इसका कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि पंजाबी इस तरह की धमकियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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