पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। विपक्षी पार्टियां, खासकर बीजेपी (BJP), लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। लेकिन ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। ऐसे में आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अगर सीएम खुद इस्तीफा न दें, तो क्या उन्हें पद से हटाया जा सकता है? क्या बीजेपी या कोई और पार्टी अपनी मर्जी से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि भारत का संविधान इस बारे में क्या कहता है और किसी मुख्यमंत्री को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया क्या होती है। सबसे बड़ा नियम: ‘बहुमत का खेल’ (Majority Rule) भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में सबसे बड़ा नियम ‘बहुमत’ का है। संविधान के अनुसार, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री वही नेता बन सकता है जिसके पास विधानसभा में 50% से ज्यादा विधायकों (MLAs) का समर्थन हो। पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। इसका मतलब है कि सरकार बनाने और चलाने के लिए 148 विधायकों की जरूरत होती है। वर्तमान में टीएमसी (TMC) के पास इससे कहीं ज्यादा विधायक हैं। नियम के मुताबिक, जब तक यह बहुमत ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है, तब तक कोई भी उन्हें सीधे तौर पर पद से नहीं हटा सकता। तो फिर सीएम को हटाने के क्या तरीके हैं? अगर किसी मुख्यमंत्री को उसके पद से हटाना हो, तो संविधान में इसके लिए कुछ स्पष्ट विकल्प और प्रक्रियाएं दी गई हैं: 1. अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion): यह विपक्ष के पास सरकार गिराने का सबसे बड़ा संवैधानिक हथियार होता है। अगर विपक्ष को लगता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं बचा है, तो वे विधानसभा में ‘अविश्वास प्रस्ताव’ ला सकते हैं। इस प्रस्ताव पर सदन में वोटिंग (voting) कराई जाती है। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है (यानी आधे से ज्यादा विधायक सरकार के खिलाफ वोट कर देते हैं), तो मुख्यमंत्री को तुरंत अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपना पड़ता है। 2. फ्लोर टेस्ट (Floor Test) और विधायकों की बगावत: कई बार सत्ताधारी पार्टी के अंदर ही कलह मच जाती है। अगर टीएमसी के कई विधायक बगावत कर दें और पार्टी से अलग हो जाएं, तो सरकार अल्पमत (minority) में आ सकती है। ऐसी स्थिति में राज्य के राज्यपाल (Governor) मुख्यमंत्री से कह सकते हैं कि वे विधानसभा में अपना बहुमत साबित करें। इसे ‘फ्लोर टेस्ट’ कहते हैं। अगर सीएम इस टेस्ट में 148 विधायकों का आंकड़ा नहीं छू पाती हैं, तो सरकार गिर जाती है। सरकार गिरने के बाद, अगर बीजेपी के पास 148 विधायकों का समर्थन हो जाता है, तो वे अपना सीएम बना सकते हैं। 3. राष्ट्रपति शासन (President’s Rule – Article 356): अगर राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाए या राज्य सरकार संविधान के हिसाब से काम न कर रही हो, तो राज्यपाल इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राज्य में ‘राष्ट्रपति शासन’ लगा सकती है। यहाँ यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रपति शासन लगने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बीजेपी अपना सीएम बना लेगी। इसका मतलब है कि राज्य की सत्ता सीधे राज्यपाल (यानी केंद्र के प्रतिनिधि) के हाथ में चली जाएगी और चुनी हुई सरकार भंग हो जाएगी। इसके कुछ समय बाद राज्य में दोबारा चुनाव (elections) करवाए जाएंगे। 4. अदालत द्वारा सजा (Court Conviction): यह एक अन्य तरीका है। अगर किसी मुख्यमंत्री पर कोई गंभीर आपराधिक मामला साबित हो जाता है और अदालत उन्हें 2 साल या उससे ज्यादा की सजा सुना देती है, तो जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उनकी विधायकी खत्म हो जाती है। विधायकी जाते ही उन्हें सीएम पद भी छोड़ना पड़ता है। आगे क्या हो सकता है? लोकतंत्र में सिर्फ विरोध प्रदर्शन करने या बयानबाजी करने से सरकारें नहीं बदलतीं। संविधान नंबरों (बहुमत) पर चलता है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जब तक ममता बनर्जी के पास 148 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है, वे अपने पद पर बनी रहेंगी। बीजेपी तभी अपना मुख्यमंत्री बना सकती है जब या तो वे अगला विधानसभा चुनाव जीतकर बहुमत हासिल करें, या मौजूदा विधानसभा में टीएमसी के विधायक टूटकर बीजेपी के पाले में आ जाएं और सत्ता का समीकरण बदल जाए। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation बंगाल में ‘कमल’ की आंधी, दीदी का किला ढहा, 15 साल बाद ऐतिहासिक तख्तापलट! बंगाल का अजब हाल: ईद पर हिंदू किसान कर रहे मांग- “मुस्लिम खरीदें हमारी गाय”, जानिए क्या है पूरा मामला