मामला क्या था? सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि पूरे देश में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए हर महीने ‘पीरियड लीव’ (Menstrual Leave) देना कानूनन जरूरी कर दिया जाए। कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बहुत ही समझदारी वाली बात कही कि अगर इसे जबरदस्ती कानून बना दिया गया, तो इसके नतीजे महिलाओं के लिए ही नुकसानदायक हो सकते हैं। महिलाओं का नुकसान कैसे? कोर्ट का मानना है कि अगर कंपनियों को मजबूर किया गया कि वे महिलाओं को हर महीने अलग से छुट्टी दें, तो प्राइवेट कंपनियां (Private Companies) महिलाओं को नौकरी देने से बचने लगेंगी। वे सोचेंगी कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को काम पर रखने में ज्यादा छुट्टियां देनी पड़ेंगी। इससे महिलाओं के करियर और उनके रोजगार के मौकों पर सीधा और बुरा असर पड़ेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि इस पर नियम बनाने का काम सरकार का है, अदालत का नहीं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation संसद में ‘डिप्टी स्पीकर’ पद पर घमासान: अमित शाह का कांग्रेस पर जोरदार पलटवार महा-संकट: ईरान युद्ध से सहमा शेयर बाजार, सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर; कोरोना के बाद देश में सबसे बड़ा आर्थिक ‘भूकंप’