भोपाल/जबलपुर: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी पत्र वायरल करने के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस और राजस्थान पुलिस को हाईकोर्ट में भारी फजीहत का सामना करना पड़ा है। इस मामले में भोपाल से गिरफ्तार किए गए कांग्रेस आईटी सेल के 3 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली और उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने पुलिस के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए मामले की जांच में हुई गंभीर लापरवाहियों पर सवाल उठाए हैं। 2 मोबाइल नंबर और 3 गिरफ्तारियां… कोर्ट ने पूछा यह कैसा गणित? बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सबसे बड़ा सवाल पुलिस की थ्योरी पर उठाया। पुलिस ने दावा किया था कि 2 मोबाइल नंबरों के आधार पर बिलाल खान, इनाम अहमद और निखिल प्रजापति को गिरफ्तार किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने सीधा सवाल दागा कि आखिर मात्र 2 मोबाइल नंबरों से 3 आरोपियों को कैसे जोड़ दिया गया? इसका कोई ठोस जवाब पुलिस के पास नहीं था। CCTV फुटेज में 12 घंटे का झोल, पुलिस बोली- ‘तकनीकी खराबी’ गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए पुलिस ने कोर्ट में जो सीसीटीवी फुटेज पेश किए, उन्होंने पुलिस की मुश्किलें और बढ़ा दीं। फुटेज के समय में पूरे 12 घंटे का अंतर पाया गया। जब कोर्ट ने इस विसंगति पर सवाल किया, तो पुलिस ने इसे महज एक ‘तकनीकी त्रुटि’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। कोर्ट ने इस दलील पर कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया है कि पीटीआरआई जहांगीराबाद (भोपाल) और जयपुर थाना क्षेत्र की पूरी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग बिना किसी छेड़छाड़ के पेश की जाए। गिरफ्तारी के वक्त क्या वर्दी में थे पुलिसकर्मी? हाईकोर्ट ने सिर्फ डिजिटल सबूतों पर ही नहीं, बल्कि गिरफ्तारी के तरीके (SOP) पर भी गहरी आपत्ति जताई। कोर्ट ने पुलिस से स्पष्ट करने को कहा है कि जिन पुलिसकर्मियों ने भोपाल से इन 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, वे उस समय वर्दी में थे या नहीं? इसके साथ ही गिरफ्तारी करने वाली टीम की पूरी जानकारी भी तलब की गई है। 29 अप्रैल का अल्टीमेटम: आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से करना होगा पेश सुनवाई के दौरान राजस्थान पुलिस ने यह कहकर आरोपियों को पेश करने में असमर्थता जताई कि वे न्यायिक हिरासत में हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने इस बहाने को साफ तौर पर अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जिसमें तीनों आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश करना अनिवार्य है। साथ ही, पुलिस को इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और सही सबूत भी कोर्ट के सामने रखने होंगे। यह पूरा मामला हाई-प्रोफाइल दबाव में पुलिस द्वारा की जाने वाली जल्दबाजी और प्रक्रियात्मक गलतियों की पोल खोल रहा है। अब सबकी निगाहें 29 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पुलिस को कोर्ट के तीखे सवालों का ठोस सबूतों के साथ जवाब देना होगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation एमपी के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: केंद्र सरकार ने गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया कैसे साकार होगा ‘विकसित भारत’ का सपना? जब 67.25% जनता सरकारी राशन के भरोसे जी रही है ।