भोपाल । मध्य प्रदेश: एक तरफ हम ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राज्य की लगभग 67.25 प्रतिशत आबादी आज भी अपने भरण-पोषण के लिए सरकारी राशन पर निर्भर है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब जनता दाने-दाने के लिए सरकार के भरोसे है, तो देश को विकसित बनाने की कल्पना कैसे पूरी होगी? क्या कहते हैं मध्य प्रदेश के आंकड़े? हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में गरीबी और सरकारी निर्भरता के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। • राज्य की अनुमानित जनसंख्या 8 करोड़ से अधिक है, लेकिन इनमें से 5.38 करोड़ से ज्यादा लोग सरकारी राशन के लाभार्थी हैं। • इसका सीधा मतलब है कि प्रदेश की 67.25% आबादी सरकारी दुकानों से मिलने वाले राशन से अपना घर चला रही है। • प्रदेश में कुल 1.31 करोड़ से अधिक राशन कार्ड जारी किए गए हैं। सिस्टम की सुस्ती: 73.85 लाख संदिग्ध, लेकिन कार्रवाई सिर्फ 15.47% पर मुफ्त राशन योजना में फर्जीवाड़े की आशंका भी बहुत बड़ी है। प्रशासन ने 73.85 लाख संदिग्ध मामलों की पहचान की है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकारी अमला केवल 15.47% मामलों में ही कार्रवाई कर पाया है। अब तक केवल 9,26,882 कार्ड ही रद्द किए जा सके हैं। बीते 6 सालों में रद्द किए गए कार्डों की स्थिति: • 2020: 1,65,829 कार्ड • 2021: 9,93,704 कार्ड • 2022: 98,186 कार्ड (कार्रवाई सबसे सुस्त रही) • 2023: 4,96,092 कार्ड • 2024: 7,04,848 कार्ड • 2025: 2,60,285 कार्ड इन 6 सालों में लगभग 27 लाख अपात्र लोगों को योजना से बाहर किया गया। इसके बावजूद, लाभार्थियों की कुल संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। साल 2021 में जहां 4.70 करोड़ लाभार्थी थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 5.34 करोड़ को पार कर गया है। विश्लेषण: कैसे होगी ‘विकसित भारत’ की कल्पना? जब हम साल 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ (Developed Nation) बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, तो मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य के ये आंकड़े कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं: 1. रोजगार बनाम राशन: किसी भी देश का विकास वहां के लोगों की आर्थिक स्वतंत्रता से तय होता है। अगर राज्य की 67% जनता खुद का राशन खरीदने में सक्षम नहीं है, तो इसका मतलब है कि रोजगार और आय के साधन सीमित हैं। असली विकास तब होगा जब लोगों के हाथ में काम होगा, न कि सिर्फ मुफ्त अनाज। 2. आर्थिक तरक्की की सच्चाई: सरकारें अक्सर जीडीपी (GDP) और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को अपनी उपलब्धि बताती हैं। लेकिन अगर बुनियादी स्तर पर इतनी बड़ी आबादी गरीबी रेखा के आसपास जीवन बिता रही है, तो वह आर्थिक तरक्की सिर्फ कागजों तक ही सीमित मानी जाएगी। 3. सिस्टम का लीकेज (Leakage): जब 73 लाख से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आते हैं और कार्रवाई सिर्फ 15 प्रतिशत पर होती है, तो यह दिखाता है कि टैक्सपेयर्स (Taxpayers) का पैसा सही जगह नहीं पहुंच रहा है। भ्रष्टाचार और सिस्टम की सुस्ती विकास के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा है। 4. निर्भरता की राजनीति: जनता को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय राशन पर निर्भर बनाए रखना राजनीतिक रूप से तो फायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह एक मजबूत और विकसित अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है। ‘विकसित भारत’ केवल चमचमाती सड़कों और बड़ी इमारतों से नहीं बनेगा। यह तब बनेगा जब देश का आम नागरिक आर्थिक रूप से इतना सशक्त हो जाए कि उसे सरकारी राशन की लाइनों में न लगना पड़े। सरकार को मुफ्त अनाज बांटने की योजनाओं के साथ-साथ रोजगार सृजन और शिक्षा पर भी उतना ही जोर देना होगा, ताकि जनता राशन के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत के भरोसे जी सके। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation वसुंधरा राजे फर्जी पत्र कांड: MP हाईकोर्ट में पुलिस के दावों की उड़ी धज्जियां, ‘हवा-हवाई’ सबूतों पर लगी कड़ी फटकार एमपी के किसानों को बड़ी राहत: सीएम मोहन यादव ने बढ़ाई स्लॉट बुकिंग की तारीख, अब 23 मई तक कर सकेंगे आवेदन