भोपाल। राजधानी भोपाल के आईएसबीटी (ISBT) बस स्टैंड पर यात्रियों की सुरक्षा और फायर सेफ्टी मानकों की जांच के लिए परिवहन विभाग ने एक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) श्री जितेंद्र शर्मा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में कुल 18 बसों की सघन जांच की गई। नियमों की अनदेखी करने वाली बसों पर विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए जब्ती और जुर्माने की कार्रवाई की।

​जांच के दौरान बस क्रमांक MP 07 ZQ 9386 को परमिट शर्तों के उल्लंघन पर और बस क्रमांक MP 04 PA 2877 को ड्राइवर केबिन में अवैध रूप से अतिरिक्त सीटें लगाने के आरोप में जब्त कर लिया गया। इसके अलावा, इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) बंद पाए जाने पर बस क्रमांक MP 36 P 2277 और केबिन में सीटें लगी होने के कारण MP 04 PA 2877 की फिटनेस तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दी गई। वहीं 4 अन्य बसों और 1 वाहन से मोटर यान अधिनियम के तहत 75,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

​बड़ा सवाल: क्या यह कार्रवाई सुरक्षा के लिए काफी है या सिर्फ खानापूर्ति?

​यह कार्रवाई कागजों और आंकड़ों में सख्त नजर आती है, लेकिन अगर जमीनी हकीकत को देखा जाए, तो इसे पूरी तरह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। अधिकतर मामलों में ऐसे अभियान महज मौसमी या तात्कालिक खानापूर्ति बनकर रह जाते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • ​लगातार निगरानी की कमी: आरटीओ की यह जांच किसी हादसे या उच्च स्तर से आदेश आने के बाद ही अचानक शुरू होती है। कुछ दिन कार्रवाई चलने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
  • ​इमरजेंसी एग्जिट का बंद होना बेहद गंभीर: बस MP 36 P 2277 में इमरजेंसी गेट का बंद पाया जाना कोई साधारण नियम उल्लंघन नहीं है। आग या दुर्घटना की स्थिति में यह सीधे तौर पर यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है। केवल फिटनेस निरस्त करना काफी नहीं, ऐसे मामलों में ऑपरेटरों पर कड़ी कानूनी धाराएं लगनी चाहिए।
  • ​केबिन में अवैध सीटें: लंबे समय से बस संचालक मुनाफे के चक्कर में ड्राइवर केबिन और गैलरी में अवैध सीटें लगाते आ रहे हैं। यह बिना मिलीभगत के लंबे रूटों पर चलना संभव नहीं है।
  • ​जांच का सीमित दायरा: राजधानी के मुख्य बस स्टैंड पर सिर्फ 18 बसों की जांच करना एक छोटा सा नमूना भर है। रोजाना सैकड़ों बसें बिना वैध अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher), बिना फर्स्ट एड और खराब मेंटेनेंस के साथ सड़कों पर दौड़ती हैं।

​जब तक हर बस की नियमित डिजिटल ट्रैकिंग, औचक मासिक ऑडिट और नियमों से खिलवाड़ करने वाले ट्रेवल्स संचालकों के परमिट स्थायी रूप से रद्द करने जैसी व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक 75,000 रुपये का जुर्माना और कुछ बसों की जब्ती केवल औपचारिकता ही साबित होगी।

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