बिश्केक:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिज़ गणराज्य (किर्गिस्तान) की आधिकारिक यात्रा पर राजधानी बिश्केक पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत बेहद गर्मजोशी और औपचारिक सम्मान के साथ किया गया। किर्गिज़ गणराज्य के मंत्रिमंडल के अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) श्री अदीलबेक कासिमालीव ने स्वयं एयरपोर्ट पर उपस्थित रहकर पीएम मोदी की अगवानी की।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच ऐतिहासिक, रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना है।

हवाई अड्डे पर पारंपरिक स्वागत

हवाई अड्डे पर दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई। पारंपरिक अंदाज में भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। पीएम मोदी ने इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए किर्गिज़ सरकार और वहां की जनता का धन्यवाद व्यक्त किया।

इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई:

1. व्यापार और आर्थिक सहयोग:

दोनों देशों ने आपसी व्यापार को बढ़ाने के नए रास्तों पर चर्चा की। कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र उद्योग और खनिज क्षेत्र में निवेश के अवसरों को तलाशने पर सहमति बनी।

2. रक्षा और सुरक्षा साझेदारी:

क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को तेज करने पर बातचीत हुई। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

3. डिजिटल और तकनीकी पहल:

भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और यूपीआई (UPI) जैसी तकनीकों को साझा करने और किर्गिस्तान में डिजिटल समाधान लागू करने पर विचार-विमर्श हुआ।

4. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा:

किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने छात्रों की सुरक्षा, वीजा प्रक्रियाओं के सरलीकरण और मेडिकल शिक्षा के मानकों को बेहतर बनाने पर बात की। इसके अलावा टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

भारतीय समुदाय से संवाद

प्रधानमंत्री ने बिश्केक में रह रहे भारतीय प्रवासियों और छात्रों से भी मुलाकात की। उन्होंने भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की और उन्हें भारत-किर्गिज़ संबंधों का एक मजबूत सेतु बताया। छात्रों ने भी प्रधानमंत्री से मिलकर अपनी पढ़ाई और वहां के अनुभवों को साझा किया।

रणनीतिक महत्व

मध्य एशिया में किर्गिस्तान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। कनेक्टिविटी (संपर्क मार्ग), ऊर्जा सुरक्षा और यूरेशियन क्षेत्र में व्यापारिक पहुंच के लिहाज से यह दौरा भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति को नई गति देने वाला साबित होगा।

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