चंडीगढ़: पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी (अपमान) की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया गया। इस बिल का मुख्य मकसद बेअदबी करने वाले दोषियों के मन में कानून का डर पैदा करना और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाना है। इस नए कानून की मुख्य बातें – 1. अब मिलेगी उम्रकैद की सजा: नए बिल के पास होने के बाद बेअदबी के मामलों में दोषियों को कम से कम 10 साल की जेल होगी। अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस सजा को बढ़ाकर उम्रकैद (Life Imprisonment) तक किया जा सकता है। 2. 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना: कड़ी जेल की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड का भी कड़ा प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर 5 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। 3. मास्टरमाइंड भी नहीं बच पाएंगे: अक्सर देखा जाता है कि बेअदबी की घटनाओं के पीछे कोई और साजिशकर्ता होता है, जो मानसिक रूप से कमजोर लोगों को मोहरा बनाकर ऐसी घटनाओं को अंजाम देता है। नए कानून में यह साफ कर दिया गया है कि मानसिक बीमारी का बहाना अब कोर्ट में बचाव का आधार नहीं होगा। साजिश रचने वाले असली मास्टरमाइंड को भी मुख्य आरोपी मानकर उम्रकैद की सजा दी जाएगी। 4. DSP स्तर के अधिकारी करेंगे जांच: इन मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए अब जांच का जिम्मा छोटे पुलिस अधिकारियों के पास नहीं होगा। कानून में यह अनिवार्य किया गया है कि मामले की जांच कम से कम DSP (डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) रैंक का अधिकारी ही करेगा। क्यों पड़ी इस सख्त कानून की जरूरत? पंजाब में पिछले 10 सालों में बेअदबी के लगभग 600 मामले सामने आ चुके हैं, जिससे लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा कानूनों (जैसे BNS की धाराओं) में सजा के प्रावधान इतने सख्त नहीं थे कि अपराधियों को रोका जा सके। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि राज्य में शांति, आपसी भाईचारा और लोगों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए इस कानून को सख्त बनाना बहुत जरूरी था। SGPC ने जताया विरोध: इस बिल को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने नाराजगी जताई है। कमेटी का कहना है कि सरकार को सिखों के धार्मिक मामलों में सीधा दखल नहीं देना चाहिए और ऐसे किसी भी बिल को विधानसभा में लाने से पहले SGPC से चर्चा की जानी चाहिए थी। विधानसभा से यह बिल पास होने के बाद पंजाब के राज्यपाल (Governor) के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर होते ही यह बिल कानून बन जाएगा और पूरे प्रदेश में सख्ती से लागू कर दिया जाएगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation पंजाब में सियासी हलचल तेज: CM भगवंत मान ने राष्ट्रपति से की राघव चड्ढा समेत 6 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग