​भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, मानसिक मजबूती और जीवन कौशल को निखारने के लिए एक विशेष पहल की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के संयुक्त प्रयास से प्रदेश भर में ‘उमंग दिवस’ आयोजित किया जा रहा है। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम की थीम ‘उमंग है तो ज़िंदगी में रंग है’ रखी गई है।

​प्रदेश के 9,339 शासकीय हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में यह आयोजन एक साथ होगा, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर शामिल होंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किशोर छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास जगाना, जीवन की रोजमर्रा चुनौतियों से निपटने के तौर-तरीके सिखाना और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।

​‘उमंग त्रिवेणी’ के जरिए 3 प्रमुख बातों पर फोकस

कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए ‘उमंग त्रिवेणी’ मॉडल लागू किया गया है, जिसके तहत तीन मुख्य पहलुओं पर काम होगा:

  1. ​उमंग SHWP: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 10 प्रमुख लाइफ स्किल्स सिखाए जाएंगे। बच्चों को हेल्पलाइन नंबर 14425 के उपयोग और मानसिक तनाव से निपटने के साधन बताए जाएंगे।
  2. ​उज्ज्वल पहल: छात्रों, विशेषकर लड़कों को ‘जेंडर चैंपियन’ के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि वे लैंगिक समानता, आपसी सम्मान और रूढ़िवादी सोच को दूर करने में भूमिका निभा सकें।
  3. ​सशक्त पहल: छात्राओं को आत्मरक्षा के व्यावहारिक तरीके सिखाए जाएंगे, जिससे वे शारीरिक स्वायत्तता और सुरक्षा को लेकर सतर्क और सजग रह सकें।

​150 मिनट की खास गतिविधियां और ‘मेरी पाती’ ड्रॉप-बॉक्स

हर स्कूल में ढाई घंटे (150 मिनट) का विशेष सत्र रखा गया है। इसमें उमंग एंथम के साथ-साथ ‘मेरी पाती’ नाम से एक ड्रॉप-बॉक्स लगाया जाएगा, जहां छात्र अपनी व्यक्तिगत समस्याएं या सवाल बिना किसी झिझक के गोपनीय रूप से लिखकर डाल सकेंगे। इसके अलावा स्कूलों में 4 एम्पावरमेंट स्टेशन बनेंगे, जिनमें ड्रीम कैचर, सशक्त सेल्फ डिफेंस, उज्ज्वल रोल प्ले और व्हिस्पर गेम जैसी रोचक गतिविधियां कराई जाएंगी। अंत में ‘रंग-ए-उमंग’ वॉल तैयार होगी।

​दिव्यांग बच्चों की भागीदारी के लिए 9,449 शिक्षक प्रशिक्षित

विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों (CWSN) की शत-प्रतिशत भागीदारी तय करने के लिए UNFPA के सहयोग से खास गाइडलाइन तैयार की गई है। इसके लिए 110 मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रदेश के 9,449 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि कोई भी बच्चा इस अभियान से अछूता न रहे।

​कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी स्कूलों में प्रेरक पोस्टर और प्रचार सामग्री भी पहुंचाई जा रही है, जिससे स्कूल परिसर में संवाद और सकारात्मक माहौल तैयार हो सके।

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