ध्रुव राठी के के आने के बाद सीजेपी आंदोलन से हिली दिल्ली! ट्रेनों में तलाशी, बॉर्डर सील… क्या इस्तीफा देंगे ज्ञानेश कुमार?

नई दिल्ली | 10 अक्टूबर

आज 10 अक्टूबर की सुबह के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक अभूतपूर्व सियासी और प्रशासनिक तनाव के दौर में दाखिल हो चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), प्रमुख छात्र संगठनों और संयुक्त विपक्ष द्वारा दी गई खुली चेतावनी की मियाद आज पूरी हो रही है। देश भर से दिल्ली कूच के आह्वान और सोशल मीडिया पर ध्रुव राठी जैसे इनफ्लुएंसर्स के मुखर समर्थन के बाद, आज का दिन इस पूरे आंदोलन का सबसे निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

दिल्ली के चारों तरफ अभेद्य पहरा: बॉर्डर से लेकर रेलवे ट्रैक तक अलर्ट

चेतावनी के प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी को पूरी तरह से सील करने की तैयारी कर ली है:

 ट्रेनों पर चौबीसों घंटे निगरानी: दिल्ली आने वाले सभी प्रमुख रेल मार्गों पर सघन जांच अभियान चल रहा है। कई एक्सप्रेस ट्रेनों को आउटर स्टेशनों पर रोककर चेकिंग की जा रही है, जिससे छात्र समूहों को एक साथ दिल्ली के मुख्य स्टेशनों पर उतरने से रोका जा सके।

 बॉर्डर पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग: गाजीपुर, टिकरी, सिंघु और बदरपुर बॉर्डर पर भारी पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां और वॉटर कैनन तैनात हैं। वाहनों की कड़ी चेकिंग के चलते दिल्ली-एनसीआर में सुबह से ही लंबा जाम देखने को मिल रहा है।

 संवेदनशील इलाकों में धारा 144: नई दिल्ली क्षेत्र, संसद मार्ग, चुनाव आयोग मुख्यालय और जंतर-मंतर के आसपास किसी भी तरह के जमावड़े पर सख्त पाबंदी है। चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों के निकास द्वार बंद कर दिए गए हैं।

सवाल सबसे बड़ा: क्या आज इस्तीफा देंगे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?

विपक्ष और CJP की मुख्य मांग चुनाव आयोग के SIR अभियान को तुरंत रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर टिकी है।

 विपक्ष का अल्टीमेटम: विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर आज आयोग ने छात्रों और नागरिकों की मांग पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया, तो यह आंदोलन संसद के आगामी सत्र और चुनावी राज्यों में सीधे जन-विद्रोह का रूप लेगा।

 संवैधानिक मर्यादा और हकीकत: सियासी गलियारों में भले ही इस्तीफे की अटकलें चरम पर हों, लेकिन संवैधानिक रूप से चुनाव आयुक्त को हटाना केवल महाभियोग के जरिए ही संभव है। ऐसे में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ज्ञानेश कुमार भारी जन-दबाव के बीच स्वयं कोई बड़ा बयान या फैसला लेंगे, या आयोग प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता खोलेगा।

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