भोपाल:

मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SEIAA) में प्रशासनिक खींचतान और गंभीर अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। SEIAA के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान (IAS सेवानिवृत्त) ने मुख्य सचिव को एक विस्तृत पत्र लिखकर पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर प्राधिकरण के कामकाज को बाधित करने, पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन और नियम विरुद्ध तरीके से क्लीयरेंस बांटने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के निलंबन और पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की गई है।

अध्यक्ष द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप:

 237 डीम्ड ईसी (Deemed EC) जारी करने का आरोप: पत्र के अनुसार, पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और सदस्य सचिव द्वारा 237 ‘डीम्ड ईसी’ जारी कर दी गईं, जबकि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। ईसी जारी करने का वैधानिक अधिकार सिर्फ भारत सरकार और SEIAA को ही प्राप्त है।

 दफ्तर का इंटरनेट और पोर्टल बंद: अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि SEIAA का पोर्टल पिछले 3 माह से बंद पड़ा है और अध्यक्ष कक्ष का इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिया गया था।

 कर्मचारियों का बार-बार फेरबदल: पत्र में लिखा गया है कि SEIAA के स्टाफ को ताश के पत्तों की तरह फेंका जा रहा है और 1 वर्ष में 20 से अधिक बार स्टाफ बदला गया। पुराने व सक्षम कर्मचारियों को हटाकर अक्षम कर्मियों को पदस्थ किया गया।

 टाइपिंग न जानने वाले और गंभीर बीमार स्टाफ की तैनाती: अध्यक्ष के निज सहायक के रूप में पुस्तकालय सहायक को पदस्थ किया गया, जिन्हें टाइपिंग नहीं आती। वहीं भृत्य के पद पर कैंसर से पीड़ित कर्मचारी को भेजा गया, जिन्हें चलने-फिरने में भी गंभीर परेशानी है।

 बैठकों में लापरवाही व कार्यवाहियों में देरी: सदस्य सचिव द्वारा नियमित बैठकें न करने, बैठकों को बार-बार रिशेड्यूल करने और अनुमोदन के बाद भी EC पत्र जारी न करने के आरोप लगाए गए हैं।

CBI जांच और निलंबन की मांग

अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव से मांग की है कि:

1. अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी, वर्तमान सदस्य सचिव हर्षल पंचोली, पूर्व प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और तत्कालीन सदस्य सचिव उमा महेश्वरी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और इन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।

2. इस पूरे मामले को शासन और भारत सरकार के संज्ञान में लाकर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाए।

3. कथित घोटाले और इससे जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच के लिए प्रकरण CBI को सौंपा जाए।

इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (नई दिल्ली) के सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय (वल्लभ भवन) को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

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