गुजराती युवक सद्दाम हुसैन मकरानी को बताया ‘पाकिस्तानी’, पासपोर्ट दिखाकर खोली भाजपा आईटी सेल के दावों की पोल नई दिल्ली / लंदन: लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर यूट्यूबर ध्रुव राठी और भारतीय छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश में भाजपा का आईटी इकोसिस्टम खुद विवादों के भंवर में फंस गया है। विरोध-प्रदर्शन में पाकिस्तानी घुसपैठ साबित करने के चक्कर में एक आम भारतीय नागरिक की तस्वीर के साथ डीपफेक/AI छेड़छाड़ कर उसे ‘पाकिस्तानी प्रदर्शनकारी’ बताकर पेश किया गया। सच सामने आते ही यह मामला भाजपा आईटी सेल की अब तक की सबसे बड़ी और शर्मनाक चूक के रूप में सामने आया है। क्या था पूरा घटनाक्रम? भाजपा दिल्ली के आधिकारिक हैंडल (@BJP4Delhi) समेत कई दक्षिणपंथी सोशल मीडिया हैंडल्स ने तस्वीरें पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि लंदन प्रदर्शन में विपक्ष के समर्थन में पाकिस्तानी झंडे लहराए गए। पोस्ट में एक तस्वीर मुख्य रूप से दिखाई गई जिसमें एक युवक कथित तौर पर हाथ में पाकिस्तान का झंडा लिए खड़ा नजर आ रहा था। पड़ताल: आईफोन को बना दिया पाकिस्तानी झंडा हमारे फैक्ट-चेकर्स और तकनीकी जांच में भाजपा के इस दावे की हवा निकल गई: असली तस्वीर: तस्वीर में दिख रहे शख्स का नाम सद्दाम हुसैन मकरानी (Saddamhusen Makrani) है, जो मूल रूप से गुजरात (भारत) के रहने वाले हैं और पिछले 6 सालों से लंदन में रह रहे हैं। आईफोन बनाम झंडा: वायरल की गई तस्वीर सद्दाम की 5 साल पुरानी (2021 की) इंस्टाग्राम मिरर-सेल्फी थी। मूल तस्वीर में उनके हाथ में iPhone था। AI का दुरुपयोग: तकनीकी जांच (OpenAI SynthID विश्लेषण) में पुष्टि हुई कि AI टूल्स का इस्तेमाल करके हाथ से फोन हटाकर वहां पाकिस्तान का झंडा चिपकाया गया था। पासपोर्ट से दिया जवाब: ट्रोलिंग और देशद्रोही बताए जाने के बाद सद्दाम ने वीडियो जारी कर अपना भारतीय पासपोर्ट (Indian Passport) दिखाया और साफ किया कि उनका पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं है। बड़ा सवाल: गड़बड़ी आईटी सेल ने रची या बिना जांचे फैलाई? इस पूरे मामले में अभी तक यह आधिकारिक खुलासा नहीं हो पाया है कि यह AI-मॉर्फ्ड तस्वीर खुद भाजपा के आईटी सेल ने तैयार करवाई या फिर किसी अनवेरिफाइड बाहरी सोर्स से मिली फर्जी तस्वीर को बिना जांचे-परखे सीधे आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से पोस्ट कर दिया गया। हालांकि, जानकारों का मानना है कि दोनों ही सूरतों में यह सत्ता पक्ष के आईटी तंत्र की अक्षम्य लापरवाही है: बिना फैक्ट-चेक नैरेटिव गढ़ना: एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के आधिकारिक हैंडल से बिना बुनियादी जांच के एक आम हिंदुस्तानी नागरिक को ‘पाकिस्तानी’ और ‘देशविरोधी’ बता देना घोर गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है। नागरिक की सुरक्षा से खिलवाड़: इस फर्जी पोस्ट की वजह से एक निर्दोष भारतीय नागरिक को भारी ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ा। एक्सपर्ट ओपिनियन: जब रक्षक ही AI का दुरुपयोग करे, तो जनता किससे बचेगी? यह विवाद सिर्फ एक फर्जी तस्वीर तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल युग के एक बड़े खतरे को उजागर करता है: दोहरा रवैया: एक तरफ सरकार डीपफेक, एआई के दुरुपयोग और भ्रामक खबरों पर लगाम लगाने के लिए सख्त दिशा-निर्देशों और कानूनों की वकालत करती है। सत्ता तंत्र का खुद गलत इस्तेमाल: दूसरी तरफ जब राजनीतिक लाभ और विरोधी नैरेटिव को कुचलने के लिए खुद सत्ताधारी दल का आईटी इकोसिस्टम AI-जनरेटेड फर्जी सामग्री का सहारा लेता पकड़ा जाए, तो विश्वसनीयता पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation पतंजलि गाय का घी जांच में मिला असुरक्षित, मध्य प्रदेश में पूरे बैच को बाजार से हटाने के आदेश