नई दिल्ली: देश की राजधानी की सड़कों से सामने आई एक तस्वीर ने लोकतंत्र की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा को ऑन-कैमरा महिला पुलिसकर्मियों द्वारा खींचकर जबरन बस में ठूंसने और हिरासत में लेने का वीडियो सामने आने के बाद व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिस देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, वहां अगर माइक और आईडी कार्ड लिए पत्रकारों के साथ यह बर्ताव हो सकता है, तो फिर थाने और चौराहों पर आम आदमी की हैसियत क्या रह जाती है? सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को साझा करते हुए विपक्ष और आम जनता दोनों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने इसे सत्ता की मनमानी बताते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर पत्रकारों की आवाज को कुचला जा रहा है। इसे ‘फ्रीडम स्ट्रगल 2.0’ का नाम देते हुए उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। सवाल केवल एक पत्रकार को हिरासत में लेने का नहीं, बल्कि व्यवस्था की उस मानसिकता का है जहां जवाबदेही मांगने वालों को ही चुप करा दिया जाता है। जब अपनी ड्यूटी निभा रहे मीडियाकर्मियों की गरिमा सड़क पर तार-तार हो सकती है, तो फिर बिना किसी पहचान और पहुंच वाले एक साधारण नागरिक के बुनियादी अधिकारों की रक्षा कौन करेगा? यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता के साथ-साथ एक आम हिंदुस्तानी के सुरक्षित और स्वतंत्र होने के भरोसे पर भी गहरा आघात है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation दिल्ली के स्वरूप नगर में भीषण आग: जान बचाने के लिए छत से कूदे लोग, 6 घायल; 15 गाड़ियों ने पाया काबू जंतर-मंतर पर महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी मामला: आरोपियों को मिली ज़मानत, रिहाई पर स्वागत को लेकर खड़ा हुआ विवाद, गाड़ियो में हज़ारों खाकी वर्दी और आर्मी यूनिफार्म दिखाई दी