नई दिल्ली:

देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों और युवतियों के साथ हुई कथित झड़प के मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। घटना के सिलसिले में पकड़े गए आरोपियों को अदालत से ज़मानत मिलने और उसके बाद संगठन द्वारा किए गए स्वागत को लेकर सोशल मीडिया और विपक्षी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

ज़मानत और स्वागत पर विवाद

प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो में कुछ युवकों द्वारा प्रदर्शनकारियों, विशेषकर एक युवती के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट के दृश्य सामने आए थे। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित संगठन से जुड़े युवकों को हिरासत में लिया था। हालांकि, मामले में लगाई गई धाराओं के आधार पर आरोपियों को कुछ ही समय में ज़मानत मिल गई।

विवाद तब और गहरा गया जब ज़मानत पर बाहर आए आरोपी का फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ स्वागत करने का वीडियो सामने आया। नागरिक समाज और छात्र संगठनों ने इसे सीधे तौर पर कानून और न्याय प्रक्रिया का मखौल करार दिया है।

गाड़ियों में पुलिस सामग्री मिलने के दावे

प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से यह दावा भी किया जा रहा है कि घटनास्थल के पास मौजूद वाहनों में पुलिस से जुड़ी सामग्रियां और वर्दियां देखी गई थीं। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि संवेदनशील इलाके में ऐसी वस्तुएं क्यों मौजूद थीं और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढिलाई बरती गई? हालांकि, पुलिस की ओर से इस दावे पर स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद से महिला सुरक्षा और सख्त कानूनी कार्रवाई के सरकारी दावों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थल पर युवतियों के साथ बदसलूकी करने वालों के खिलाफ जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज होना पुलिस की ढीली पैरवी को दर्शाता है।

नागरिकों का कहना है कि अगर राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले धरना स्थल पर ही ऐसी घटनाओं के आरोपियों को तुरंत राहत मिल जाती है, तो यह कड़ा संदेश देने के बजाय ऐसे तत्वों का हौसला बढ़ाने जैसा है। मामले को लेकर दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।

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