​नई दिल्ली:

लोन की किश्तें (EMI) न चुका पाने वाले ग्राहकों के साथ मनमानी और गुंडागर्दी करने वाली रिकवरी एजेंसियों और फाइनेंस कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कर्जदार भले ही डिफॉल्टर हो, लेकिन किसी भी बैंक या वित्तीय कंपनी को कानून हाथ में लेने या बलपूर्वक जब्ती करने का अधिकार नहीं है।

​सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने ‘हरि दत्त शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य’ मामले में चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​पीड़ित हरि दत्त शर्मा ने अपनी आजीविका चलाने के लिए 25 मार्च 2019 को चोलामंडलम फाइनेंस से लोन लेकर Tata SFC 407 ट्रक खरीदा था। कुछ किश्तें बकाया होने पर कंपनी के रिकवरी एजेंट 9 अप्रैल 2023 की देर रात करीब 1 बजे पहुंचे। आरोप है कि बिना किसी पूर्व लिखित सूचना के एजेंटों ने ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ा और उसे जबरन उठा ले गए। इसके बाद कंपनी ने उस वाहन की नीलामी भी कर दी।

​पीड़ित ने पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।

​सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां:

  1. ​वसूली का अधिकार है, पर कानून के दायरे में: अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लोन बकाया होने पर वित्तीय संस्थान को पैसे वापस मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह अधिकार कानून, नियमों और तय दिशानिर्देशों के दायरे में रहकर ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
  1. ​कर्जदार कानून से बाहर नहीं: कर्जदार पर बकाया होने का मतलब यह कतई नहीं है कि फाइनेंस कंपनी के एजेंट आधी रात को डरा-धमकाकर या ताला तोड़कर गाड़ी ले जाएं।

​सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:

​सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अवैध जब्ती को देखते हुए फाइनेंस कंपनी को सख्त निर्देश दिए:

  • ​₹10 लाख का मुआवजा: मानसिक प्रताड़ना और आजीविका के साधन के नुकसान के बदले पीड़ित को ₹10 लाख की हर्जाना राशि दी जाए।
  • ​बिक्री राशि की वापसी: कंपनी ने ट्रक बेचकर जो ₹4.50 लाख वसूले थे, वह पूरी राशि 6% सालाना ब्याज के साथ पीड़ित को लौटाई जाए।
  • ​लोन खाते बंद: पीड़ित के दोनों लोन खाते तत्काल प्रभाव से बंद (Close) किए जाएं।

​आम जनता के लिए जरूरी बातें (क्या करें ऐसी स्थिति में?):

  • ​रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर रोक: आरबीआई (RBI) के नियमों के अनुसार रिकवरी एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकते हैं। वे अभद्रता, धमकी या आधी रात को कार्रवाई नहीं कर सकते।
  • ​दस्तावेज संभाल कर रखें: लोन एग्रीमेंट, भुगतान की रसीदें और कंपनी द्वारा भेजे गए किसी भी नोटिस को सुरक्षित रखें।
  • ​शिकायत कहां करें: जबरन वसूली या बदसलूकी होने पर नजदीकी पुलिस थाने, बैंक लोकपाल (Ombudsman) या उपभोक्ता अदालत (Consumer Forum) में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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