नई दिल्ली:

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में महिलाओं की सुरक्षा, उनके खिलाफ होने वाली हिंसा और इसके सामाजिक व आर्थिक दुष्प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि समाज में महिलाओं के लिए बना डर का माहौल किस तरह उनके अधिकारों और विकास को सीमित कर रहा है।

​राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को 3 मुख्य श्रेणियों (Cost of Violence) में विभाजित करते हुए कई आंकड़े साझा किए:

1. प्रत्यक्ष शारीरिक हिंसा (Direct / Physical Violence)

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा उनके जन्म से पहले ही शुरू हो जाती है।

  • कन्या भ्रूण हत्या: देश में जन्म लेने से पहले ही हर साल लगभग 4.5 lakh अजन्मी बच्चियों की कोख में हत्या कर दी जाती है।
  • उत्पीड़न और शारीरिक हिंसा: समाज में लगभग 80% लड़कियों या महिलाओं को कभी न कभी किसी स्तर पर उत्पीड़न (Harassment) का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा 29% से 30% महिलाएं प्रत्यक्ष शारीरिक हिंसा का शिकार होती हैं।
  • बलात्कार के आंकड़े: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आंकड़ों के अनुसार देश में 100 में से 6 महिलाओं (6%) को बलात्कार जैसी भयानक हिंसा का सामना करना पड़ता है।

2. अवसरों की हानि (Violence of Opportunity)

हिंसा और असुरक्षा का माहौल महिलाओं के विकास के रास्तों को बंद कर देता है। राहुल गांधी ने बताया कि ‘कुछ हो गया तो’ का डर महिलाओं से उनके आगे बढ़ने के अवसर छीन लेता है।

  • ​इस डर और असुरक्षा के माहौल के चलते करीब 50% युवतियों और महिलाओं को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ती है या फिर वे नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं।

3. आर्थिक बोझ (Financial Violence)

सुरक्षा के अभाव का सीधा असर महिलाओं की जेब पर भी पड़ता है।

  • ​आंकड़ों के हवाले से उन्होंने बताया कि सुरक्षित यात्रा और सुरक्षा के अन्य इंतजामों को सुनिश्चित करने के लिए देश की एक सामान्य महिला को हर साल औसतन 17,500 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।

राहुल गांधी ने कहा  –

” महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा केवल शारीरिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक रूप से भी देश की आधी आबादी को पीछे धकेल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक समाज और व्यवस्था महिलाओं को पूरी सुरक्षा और बराबरी का माहौल नहीं देती, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।”

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