जयपुर (बगरू): राजधानी के बगरू इलाके के रामपुरा-कंवरपुरा गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बदहाली देखने पहुंचे CJP कार्यकर्ताओं को मदद के बदले मारपीट का सामना करना पड़ा।

  • ​मौत के साए में पढ़ाई: गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल की हालत बेहद दयनीय है। छत के नाम पर टूटे हुए टिनशेड और चारों तरफ ढहती दीवारें हैं। 100 से अधिक मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर इन्हीं जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं।
  • ​मदद के बदले हमला: जब ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम के तहत आशुतोष राका और उनकी टीम इस जर्जर ढांचे की मरम्मत करने पहुंची, तो ग्रामीणों ने गलतफहमी और राजनीतिक कारणों से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में कई कार्यकर्ता घायल हो गए।
  • ​सवालिया निशान: घटना के बाद ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल की समस्या विधायक जी सुलझाएंगे। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि:
    • ​वर्षों से जब यह स्कूल खंडहर बना हुआ था, तब जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और प्रशासन कहां थे?
    • ​अगर सरकार समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाती, तो किसी बाहरी संस्था या नागरिक को आगे आने की जरूरत ही क्यों पड़ती?
    • ​जब कोई नागरिक अपनी पहल से बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए काम करता है, तो उसे व्यवस्था सुधारने के बजाय हिंसा और विरोध का सामना क्यों करना पड़ता है?

​यह घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही और उस पर पर्दा डालने की मानसिकता का एक कड़वा सच उजागर करती है।

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