क्या कमजोर पड़ रहे हैं दिल्ली-लखनऊ के रिश्ते? लखनऊ/दिल्ली: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। राजनीतिक गलियारों से छनकर आ रही ‘दबी-दबी’ खबरों की मानें तो दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरियों तक यह बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई दिल्ली के बड़े नेता उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की कोई बड़ी स्क्रिप्ट लिख रहे हैं? राम मंदिर विवाद और ‘घेराबंदी’ के कयास हाल ही में विपक्ष द्वारा राम मंदिर निर्माण और जमीनों से जुड़े कुछ तथाकथित विवादों को हवा दी गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसी विवाद को बहाना बनाकर पार्टी के भीतर और बाहर योगी आदित्यनाथ को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष जहां इस मुद्दे पर हमलावर है, वहीं सोशल मीडिया पर यह कयास भी लगाए जाने लगे कि क्या अंदरूनी राजनीति के तहत सीएम योगी को हटाने की तैयारी हो रही है? पूरी ताकत से मैदान में डटे ‘योगी’ इन तमाम अटकलों और चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि वे बैकफुट पर खेलने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। हाल ही में लखनऊ में हुए बड़े सांगठनिक कार्यक्रमों और केंद्रीय नेताओं के दौरों के बीच योगी आदित्यनाथ का ‘पावर शो’ साफ देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने अपनी कानून-व्यवस्था वाली कड़क छवि और विकास कार्यों के दम पर यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल उनका कोई विकल्प नहीं है। जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी उनकी लोकप्रियता जस की तस बनी हुई है। अब किसकी होगी जीत? दिल्ली के दिग्गज या लखनऊ के ‘योगी’? इस सियासी शह और मात के खेल में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जीत किसकी होगी? पहला पहलू: भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जानता है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए योगी आदित्यनाथ जैसा मजबूत और लोकप्रिय चेहरा बेहद जरूरी है। दूसरा पहलू: राजनीति में कोई भी फैसला स्थाई नहीं होता। फिलहाल दोनों ही पक्षों (दिल्ली और लखनऊ) के लिए मिलकर चलना मजबूरी भी है और जरूरत भी। यह कोई ‘आर-पार की जंग’ नहीं बल्कि 2027 के चुनावों से पहले पार्टी के भीतर वर्चस्व और संतुलन बनाने की एक कोशिश है। फिलहाल तो सीएम योगी पूरी मजबूती से मैदान में डटे हैं और दिल्ली भी उनके काम की तारीफ कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी की राजनीति में ऊंट किस करवट बैठता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज, हुजूर से रामेश्वर शर्मा और सांची से डॉ. प्रभुराम चौधरी रेस में सबसे आगे; जानिए अंदरूनी समीकरण दतिया उपचुनाव 2026: क्या बगावत के आगे झुकेगी बीजेपी? नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने से खड़ा हुआ ‘अनुशासन’ का बड़ा संकट