भोपाल/ मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में मोहन यादव सरकार के आगामी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस बार के विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन, परफॉर्मेंस और आने वाले समय के राजनीतिक समीकरणों को साधने की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों और राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो इस रेस में भोपाल की हुजूर सीट से फायरब्रांड विधायक रामेश्वर शर्मा और रायसेन की सांची सीट से वरिष्ठ नेता डॉ. प्रभुराम चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। दोनों ही नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार और दमदार कामकाज उनकी दावेदारी को बेहद मजबूत बना रहा है।

हुजूर में ‘विकास के संकल्प’ से चर्चाओं में रामेश्वर शर्मा

भोपाल की हुजूर विधानसभा से लगातार रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करने वाले रामेश्वर शर्मा की गिनती भाजपा के सबसे सक्रिय और प्रखर नेताओं में होती है। मंत्रिमंडल की रेस में उनका नाम आने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका ‘काम करने का अंदाज’ है।

 ग्राउंड पर चौबीस घंटे एक्टिव: रामेश्वर शर्मा अपनी विधानसभा में सुबह से लेकर देर रात तक जनता के बीच सक्रिय रहते हैं। कोलार सिक्स लेन प्रोजेक्ट हो या ग्रामीण इलाकों में सड़कों और पानी का जाल बिछाना, उनके विकास कार्यों की तारीफ विरोधी भी करते हैं।

 हिंदुत्व की प्रखर आवाज और कड़क छवि: अपनी बेबाक बयानबाजी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर कड़क रुख के कारण वे संगठन और जनता, दोनों के चहेते बने हुए हैं। राजधानी भोपाल और आसपास के जिलों में उनका राजनीतिक प्रभाव काफी मायने रखता है।

सांची के ‘सुलझे और अनुभवी’ चेहरे डॉ. प्रभुराम चौधरी का मजबूत दावा

दूसरी ओर, रायसेन जिले की सांची विधानसभा से विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी का दावा भी बेहद दमदार माना जा रहा है। वे पहले भी सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और उनकी गिनती एक बेहद गंभीर और अनुभवी राजनेता के रूप में होती है।

 प्रशासनिक अनुभव और साफ छवि: पेशे से डॉक्टर होने के कारण डॉ. प्रभुराम चौधरी का फोकस हमेशा स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर रहा है। क्षेत्र के जिला अस्पताल के अपग्रेडेशन से लेकर सिंचाई परियोजनाओं तक, उनके काम की गति हमेशा व्यवस्थित रही है।

 सौम्य व्यवहार और क्षेत्रीय समीकरण: डॉ. चौधरी की सबसे बड़ी ताकत उनका बेहद शांत, सुलभ और सौम्य व्यवहार है। सांची और रायसेन संभाग में वे हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन और वरिष्ठता को देखते हुए आलाकमान उन पर भरोसा जता सकता है।

क्या कहता है राजनीतिक विश्लेषण?

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जहां रामेश्वर शर्मा अपनी ‘आक्रामक विकास नीति और भारी जनसमर्थन’ के दम पर मंत्रिमंडल में जगह बनाने के स्वाभाविक हकदार दिखते हैं, वहीं डॉ. प्रभुराम चौधरी अपनी ‘वरिष्ठता, प्रशासनिक अनुभव और साफ-सुथरी छवि’ के कारण मजबूत दावेदार हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली और भोपाल में चल रहे मंथन के बाद जब अंतिम सूची सामने आती है, तो इन दोनों दिग्गजों को क्या जिम्मेदारी मिलती है। लेकिन फिलहाल, दोनों नेताओं के समर्थक और क्षेत्र की जनता इस विस्तार को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

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