भोपाल: उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भी समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार इस कानून को राज्य में लागू करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

सरकार द्वारा गठित की गई हाई-लेवल कमेटी इसके ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है। सरकार का दावा है कि इस कानून को लेकर राज्य के लाखों लोगों से सुझाव लिए गए हैं, जिनमें से बहुसंख्यक आबादी ने इसका समर्थन किया है। माना जा रहा है कि ड्राफ्ट को मंजूरी मिलते ही सरकार इसे आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर सकती है।

MP के UCC ड्राफ्ट की 5 सबसे बड़ी और खास बातें

मध्य प्रदेश में जिस UCC मॉडल पर विचार किया जा रहा है, उसमें शादी और तलाक के अलावा कई आधुनिक और कड़े नियम जोड़े जा रहे हैं:

1 लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: बिना शादी के साथ रहने वाले (Live-in) जोड़ों को जिला प्रशासन के पास अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। तय समय में रजिस्ट्रेशन न कराने पर जेल या भारी जुर्माना हो सकता है। यदि उम्र 21 साल से कम है, तो इसकी सूचना सीधे माता-पिता को दी जाएगी।

2 बहुविवाह( अनेक शादी) (Polygamy) पर पूरी तरह रोक: कानून लागू होने के बाद किसी भी धर्म का व्यक्ति (महिला या पुरुष) अपने जीवित जीवनसाथी के रहते दूसरी शादी नहीं कर सकेगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पुरुषों को मिलने वाली चार शादियों की छूट इसके बाद खत्म हो जाएगी। इतना ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है, तो वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए भी रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाएगा।

3 लड़कियों को संपत्ति में बराबर का हक: माता-पिता की संपत्ति पर बेटे और बेटी का एक समान अधिकार होगा, चाहे बेटी शादीशुदा ही क्यों न हो।

4 हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर बैन: मुस्लिम समाज में प्रचलित ‘इद्दत’ और ‘हलाला’ जैसी प्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित कर अपराध की श्रेणी में डाला जाएगा।

5 सबके लिए एक जैसे तलाक के नियम: पति-पत्नी दोनों को तलाक के समान अधिकार मिलेंगे और कोई भी व्यक्ति बिना कोर्ट जाए (धार्मिक रीति से) एकतरफा तलाक नहीं दे सकेगा।

आदिवासियों को बड़ी छूट: उत्तराखंड की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी आदिवासी (Scheduled Tribes) आबादी को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, ताकि उनकी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों पर कोई आंच न आए।

मुस्लिम समुदाय और विपक्ष क्यों जता रहा है नाराजगी?

इस कानून को लेकर मुस्लिम संगठनों और विपक्ष की तरफ से मुख्य रूप से ये आपत्तियां सामने आ रही हैं:

 धार्मिक आजादी पर असर: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि शादी, तलाक और वरासत (संपत्ति का बंटवारा) उनके धार्मिक कानून (शरिया) का हिस्सा हैं। UCC आने से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और सदियों पुरानी परंपराएं प्रभावित होंगी।

 शराबबंदी की उठी मांग: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम धर्मगुरुओं का तर्क है कि यदि सरकार वाकई समाज सुधार और समानता चाहती है, तो उसे पर्सनल लॉ बदलने के बजाय शराब और नशीले पदार्थों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना चाहिए, जिससे घरेलू हिंसा रुक सके। हालांकि, सरकार का रुख साफ है कि UCC का संबंध केवल नागरिक मामलों (Civil Matters) से है, शराब नीति से नहीं।

 विपक्ष का सवाल (आदिवासी एंगल): विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब राज्य की एक बड़ी आदिवासी आबादी को इससे बाहर रखा जा रहा है, तो फिर इसे ‘समान’ (Uniform) नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है?

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