रायसेन की सियासत में ‘महाभारत’: अस्पताल के उद्घाटन से स्वास्थ्य मंत्री आउट! शिवराज के मंच के पीछे ‘रामपाल का गेम’? सिलवानी /रायसेन: रायसेन जिले के सिलवानी में हाल ही में संपन्न हुआ भव्य विकास पर्व क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की एक बड़ी सौगात लेकर आया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में करीब 41 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया, जिसमें सिलवानी का नवनिर्मित सिविल अस्पताल भी शामिल है। लेकिन इस पूरे गरिमामय कार्यक्रम के दौरान सियासी हलकों में एक सवाल लगातार तैरता रहा कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के इस इतने बड़े आयोजन से खुद प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल क्यों नदारद रहे? क्षेत्र के आमंत्रण पत्रों और मुख्य मंच के बैनरों से भी स्वास्थ्य मंत्री का नाम और तस्वीर न होना अब जिले की राजनीति में गहरी चर्चा और कयासों का विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग की बड़ी सौगात, लेकिन मुखिया का नाम ही गायब! सिलवानी में आधुनिक सिविल अस्पताल की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जिसे सरकार ने पूरा किया। चूंकि यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम था, इसलिए अमूमन ऐसे मौकों पर विभागीय मंत्रियों की मौजूदगी तय मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति के पीछे किसी बड़े मनमुटाव से ज्यादा, केंद्रीय प्रोटोकॉल और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व सांगठनिक तालमेल की कमी एक बड़ी वजह हो सकती है। जब केंद्र के बड़े मंत्रियों का प्रोटोकॉल लागू होता है, तो कई बार स्थानीय रूपरेखा बदल जाती है। क्षेत्रीय रसूख और सांगठनिक सामंजस्य का गणित रायसेन जिले की राजनीति हमेशा से बेहद दिलचस्प और दिग्गजों के प्रभाव वाली रही है। एक तरफ जहां उदयपुरा विधायक और स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का प्रभाव जिले में लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिलवानी-बेगमगंज क्षेत्र में पूर्व मंत्री रामपाल सिंह राजपूत का अपना एक मजबूत, पारंपरिक और पुराना राजनीतिक आधार है। जानकारों की मानें तो जब केंद्रीय मंत्री के स्तर पर इतना बड़ा आयोजन स्थानीय स्तर पर तय होता है, तो पूरा प्रशासनिक अमला बड़े प्रोटोकॉल को फॉलो करने में जुट जाता है। ऐसे में कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय कप्तानों के बीच सामंजस्य बिठाने में कुछ कड़ियां छूट जाती हैं, जिसे अक्सर राजनीतिक चश्मे से देखा जाने लगता है। एकजुटना के दावों के बीच कयासों का बाजार गर्म हालांकि, बीजेपी संगठन हमेशा से अपने नेताओं के बीच बेहतर तालमेल, अनुशासन और एकजुटता का दावा करता आया है। इस कार्यक्रम को लेकर भी अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नेताओं के बीच किसी भी तरह की कोई व्यक्तिगत रार नहीं है, बल्कि व्यस्तताओं और विभागीय कार्यक्रमों के चलते यह स्थिति बनी। फिर भी, सिलवानी के इस मंच ने विकास की बड़ी सौगात देने के साथ-साथ रायसेन जिले की सियासत को एक नया विमर्श जरूर दे दिया है। अब क्षेत्र के नागरिकों और राजनीतिक पंडितों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में जिले के बड़े विकास कार्यों में इन सभी प्रमुख चेहरों की जुगलबंदी किस तरह मंचों पर एक साथ नजर आती है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation सोम डिस्टिलरी पर आबकारी आयुक्त का सबसे बड़ा फैसला: अब कभी नहीं खुलेगी फैक्ट्री, पुनः संचालन पर लगी पूर्ण रोक