नई दिल्ली/भोपाल: सोशल मीडिया और कई व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act, 2009) में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। वायरल पोस्ट के मुताबिक, “निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2026” के जरिए धारा 23 में नई उपधाराएं जोड़कर पहले से कार्यरत (In-Service) शिक्षकों को TET और CTET की बाध्यता से हमेशा के लिए मुक्ति दे दी गई है। दावे में यह भी कहा जा रहा है कि अब पुराने शिक्षकों की नौकरी, सीनियरिटी और प्रमोशन पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर कोई भी नया नियम लागू नहीं होगा। जब हमारी Fact Check टीम ने इस खबर की गहराई से पड़ताल की, तो सच्चाई कुछ और ही निकलकर सामने आई। क्या है वायरल दावा? सोशल मीडिया पर ‘न्यूज़ ब्रेक मीडिया’ के हवाले से एक लंबी रिपोर्ट शेयर की जा रही है। इसमें दावा है कि: RTE एक्ट में संशोधन करके नई धारा 23(4), 23(5), 23(6) और 23A जोड़ी गई है। पुराने शिक्षकों पर TET परीक्षा पास करने का नियम पिछली तारीख से लागू नहीं होगा। जिन शिक्षकों के पास TET सर्टिफिकेट नहीं है, उन पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) या सेवा समाप्ति जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। फैक्ट चेक: पड़ताल में क्या आया सामने? हमारी टीम ने इस दावे की सत्यता जांचने के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों को खंगाला। पड़ताल में निम्नलिखित मुख्य बिंदु सामने आए: 1. संसद में सिर्फ बिल पेश हुआ है, कानून नहीं बना (The Reality of Bill 2026) सच्चाई यह है कि राज्यसभा में एक प्राइवेट मेंबर या एक अलग प्रारूप में “The Right of Children to Free and Compulsory Education (Amendment) Bill, 2026” का केवल एक मसौदा (Draft Bill) चर्चा या प्रस्ताव के रूप में लाया गया था। यह अभी तक संसद से पास नहीं हुआ है और न ही इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली है। इसलिए, इसे एक लागू कानून या ‘ऐतिहासिक बदलाव’ मान लेना पूरी तरह गलत और भ्रामक है। 2. सुप्रीम कोर्ट का फैसला: इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य है वायरल मैसेज में किए जा रहे दावों के ठीक विपरीत, मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बड़ा और अंतिम फैसला सुनाया है। * जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने ‘अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में दायर करीब 65 से ज्यादा पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए एक संवैधानिक आवश्यकता है। इसलिए कार्यरत शिक्षकों को सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना ही होगा। 3. कोर्ट ने दी है राहत, लेकिन सिर्फ ‘समय’ की (Final Deadline: 31 August 2028) सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की व्यावहारिक दिक्कतों को समझते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करके एक राहत जरूर दी है। कोर्ट ने TET पास करने की समय सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया है। अब सभी कार्यरत शिक्षकों को हर हाल में 31 अगस्त 2028 तक TET परीक्षा पास करनी होगी। यदि कोई शिक्षक इस तय समय तक योग्यता हासिल नहीं करता है, तो वह सेवा में बने रहने का हकदार नहीं होगा। सच बनाम झूठ: जानिए इस वायरल खबर की असलियत • वायरल दावा: RTE एक्ट 2026 के तहत पुराने शिक्षकों को TET/CTET से हमेशा के लिए छूट मिल गई है। • जमीनी हकीकत: यह दावा पूरी तरह गलत है। सरकार द्वारा ऐसा कोई कानून पास नहीं हुआ है। केवल एक ड्राफ्ट बिल का हवाला देकर अफवाह फैलाई जा रही है। • वायरल दावा: बिना TET परीक्षा पास किए भी शिक्षकों की नौकरी और प्रमोशन पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। • जमीनी हकीकत: यह बात गलत है। सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के ताजा आदेश के अनुसार, प्रमोशन और सेवा में बने रहने के लिए TET पास करना अनिवार्य है। • वायरल दावा: नए नियम पुरानी तारीखों से लागू नहीं हो सकते, इसलिए पुराने शिक्षकों पर यह बाध्यता नहीं है। • जमीनी हकीकत: यह दावा भी गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि RTE एक्ट बच्चों के भविष्य के लिए है, इसलिए पहले से कार्यरत शिक्षकों को भी यह न्यूनतम योग्यता पूरी करनी ही होगी। • वायरल दावा: सरकार ने पुराने शिक्षकों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर पूर्ण रोक लगा दी है। • जमीनी हकीकत: हकीकत यह है कि कोर्ट ने केवल 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। अगर इस तय समय सीमा तक TET पास नहीं किया गया, तो सेवा पर संकट आ सकता है। हमारी पड़ताल में वायरल हो रहा यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और अफवाह साबित हुआ है। RTE एक्ट में ऐसा कोई संशोधन लागू नहीं हुआ है जो TET की अनिवार्यता को खत्म करता हो। सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश के अनुसार, सभी इन-सर्विस शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation मध्य प्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: कर्मचारियों का DA 3% बढ़ा, युवाओं के लिए नई ‘शौर्य संकल्प योजना’ काम एक, नियम एक तो विभाग अलग क्यों? MP शिक्षक कांग्रेस ने उठाई स्कूल शिक्षा और ट्राइबल विभाग के विलय की मांग