अगर आपके घर में शादी, बच्चे का जन्म या कोई अन्य शुभ अवसर है और किन्नर (ट्रांसजेंडर समुदाय) जबरन मुंहमांगी ‘बधाई’ या ‘नजराना’ मांग रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी और काम की खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक बेहद अहम फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि शुभ अवसरों पर किन्नरों का ‘बधाई’ या ‘नजराना’ लेना कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि कोई भी व्यक्ति या समूह कानून के अधिकार के बिना आम जनता से जबरन पैसे नहीं वसूल सकता।

क्या था पूरा मामला?

यह फैसला जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेंच ने सुनाया। दरअसल, उत्तर प्रदेश के गोंडा की रहने वाली एक ट्रांसजेंडर (किन्नर) रेखा देवी ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि दूसरे किन्नर उनके अधिकार क्षेत्र (इलाके) में दखल दे रहे हैं और उन्हें सुरक्षा दी जाए। इस याचिका के जरिए उन्होंने एक तरह से ‘बधाई’ वसूलने के लिए अपना इलाका तय करने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कई अहम टिप्पणियां की हैं, जो आम जनता को राहत देने वाली हैं:

• परंपरा कोई कानून नहीं: कोर्ट ने साफ कहा कि किन्नरों द्वारा सालों से मांगे जाने वाले ‘नेग’, ‘बधाई’ या ‘नजराना’ की परंपरा को कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता।

• जबरन वसूली एक अपराध: अदालत ने कहा कि अगर कोई गैंग बनाकर या जबरदस्ती पैसे वसूलता है, तो यह ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के तहत एक अपराध माना जाएगा।

• नए कानून में भी अधिकार नहीं: जजों ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019’ में भी किन्नरों को ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया गया है कि वे किसी से जबरन पैसा वसूल सकें।

• कोई टैक्स या फीस नहीं: बिना किसी कानूनी आधार के, किसी भी नागरिक से पैसे, टैक्स या फीस वसूलने की अनुमति किसी को भी नहीं दी जा सकती।

आम जनता के लिए इस फैसले के क्या मायने हैं?

इस फैसले के बाद अब तस्वीर एकदम साफ है। लोग अपनी खुशी और स्वेच्छा से जो भी नेग या उपहार देना चाहें, दे सकते हैं। लेकिन, कोई भी किन्नर समूह ‘इलाका बांटकर’ या दबाव बनाकर आम लोगों से जबरदस्ती पैसे नहीं वसूल सकता। अगर कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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