भोपाल:

मध्यप्रदेश के गांवों में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत हर घर तक नल तो पहुंच गया है, लेकिन अब यह पानी पूरी तरह से फ्री नहीं रहेगा। राज्य सरकार अब गांवों में भी शहरों की तर्ज पर पानी के इस्तेमाल पर ‘टैक्स-फाइन सिस्टम’ लागू करने जा रही है।

अक्सर देखा जाता है कि मुफ्त में मिलने वाली चीजों की लोग कद्र नहीं करते। गांवों में नलों को खुला छोड़ देना या पानी को सड़कों पर फालतू बहने देना एक आम समस्या बन गई है। यह एक कड़वी सच्चाई है कि अगर जनता से किसी संसाधन की इज्जत करवानी है और उसे फालतू बर्बाद होने से बचाना है, तो जुर्माना बहुत जरूरी है। जब जेब से पैसे कटेंगे और पानी का बिल आएगा, तभी लोग इसकी असली कीमत समझेंगे। इसी सोच और पानी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ‘नल जल योजना नियम 2026’ का ड्राफ्ट तैयार किया गया है।

क्या हैं नए नियम के सबसे अहम बदलाव?

• 3 महीने बिल नहीं भरा तो कटेगा कनेक्शन: अब पानी के बिल का भुगतान करना अनिवार्य होगा। अगर कोई लगातार 3 महीने तक पानी का बिल जमा नहीं करता है, तो पंचायत के पास उसका नल कनेक्शन काटने का पूरा अधिकार होगा।

• पानी की बर्बादी पर 500 रुपये तक जुर्माना: अगर आपके आंगन में पानी बहकर सड़क पर जा रहा है या आप पानी का फिजूलखर्च कर रहे हैं, तो तैयार रहिए। पानी बर्बाद करते पाए जाने पर 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

• हर महीने 10 हजार लीटर की लिमिट: अब गांवों में भी पानी के इस्तेमाल की एक लिमिट तय होगी। हर महीने 10 हजार लीटर तक का पानी एक मानक लिमिट में रहेगा। इससे ज्यादा पानी इस्तेमाल करने पर अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा।

• पंचायत और पानी समिति तय करेगी रेट: पानी का टैक्स कितना होगा, यह हर गांव के लिए अलग-अलग हो सकता है। ग्राम पंचायत अपनी ‘पानी समिति’ के साथ मिलकर यह तय करेगी कि योजना को चलाने में कितना खर्च आ रहा है, और उसी आधार पर टैक्स वसूला जाएगा।

• गरीबों को मिलेगी छूट: पंचायतों को यह विशेष अधिकार भी दिया गया है कि वे गांव के 5 से 10 सबसे कमजोर परिवारों (जैसे- अंत्योदय श्रेणी, विधवा या दिव्यांग) को पानी के बिल में छूट दे सकती हैं।

• सप्लाई रुकी तो सचिव होंगे जिम्मेदार: सिर्फ जनता पर ही नियम लागू नहीं होंगे, बल्कि अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर गांव में पानी की सप्लाई रुकती है, पानी गंदा आता है या तकनीकी खराबी आती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर पंचायत सचिव और पानी समिति जिम्मेदार होगी।

30 अप्रैल तक मांगे गए हैं सुझाव

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस नए नियम का पूरा खाका तैयार कर लिया है। अगर किसी पंचायत या आम नागरिक को इन नियमों पर कोई आपत्ति है या वे कोई बदलाव चाहते हैं, तो 30 अप्रैल तक अपने सुझाव सीधे विभाग को भेज सकते हैं।

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