भोपाल/रायसेन:

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि 21 अप्रैल से ‘बड़े किसानों’ के लिए ई-उपार्जन (e-Uparjan) पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग शुरू हो जाएगी। लेकिन आज जब किसान बुकिंग करने पहुंचे, तो उन्हें पोर्टल पर एक ऐसा मैसेज दिखा जिसने उनका गुस्सा और बढ़ा दिया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या अब बड़ा किसान होना कोई मुसीबत या अभिशाप बन गया है?

तारीख 21 अप्रैल, लेकिन पोर्टल का मैसेज पुराना

आज सुबह से ही किसान अपना काम-काज छोड़कर कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए बैठे हैं। लेकिन पोर्टल चालू होना तो दूर, वहां स्पष्ट रूप से यह मैसेज दिखाई दे रहा है कि “स्लॉट बुकिंग अभी केवल छोटे किसानों के लिए है”, जबकि आज की ही तारीख बड़े किसानों के लिए तय की गई थी। सरकार के ऐलान और पोर्टल की इस जमीनी हकीकत के बीच किसान बुरी तरह पिस रहा है। यह तकनीकी खामी है या सिस्टम की लापरवाही, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

सुबह से साइबर कैफे के चक्कर काट रहे किसान

किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत से फसल उगाई है। पहले सैटेलाइट वेरिफिकेशन के नाम पर रकबा घटा दिया गया और अब जब फसल बेचने का समय आया, तो पोर्टल धोखा दे रहा है। किसान मंडियों, सोसायटियों और ऑनलाइन दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा मिल रही है। मौसम की अनिश्चितता के बीच खुले आसमान के नीचे रखा गेहूं खराब होने का डर भी किसानों को सता रहा है।

तारीख बढ़ी, लेकिन जब पोर्टल ही नहीं चलेगा तो क्या फायदा?

राहत की बात बस इतनी है कि सरकार ने बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 कर दी है। साथ ही खरीदी केंद्रों की डेली तौल लिमिट भी 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दी गई है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब तक पोर्टल अपडेट नहीं होगा और मैसेज बदलना बंद नहीं होगा, तब तक इन बढ़ी हुई तारीखों और लिमिट का किसानों के लिए कोई मतलब नहीं है।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम बिना किसी परेशानी के कब मिल पाता है।

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