चंडीगढ़। नई दिल्ली

आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर इस समय एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आया हुआ है। जो राघव चड्ढा कभी पार्टी के सबसे खास और चहेते युवा नेता माने जाते थे, आज उन्हें संसद में बोलने से रोका जा रहा है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि राघव को पार्टी के समय में से बोलने का मौका न दिया जाए।

इससे ठीक 1 दिन पहले उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से भी हटा दिया गया था। इस पूरी घटना के बाद अब राजनीतिक गलियारों में 1 सबसे बड़ी चर्चा चल रही है – क्या राघव चड्ढा से उनकी अपनी ही पार्टी के नेता जलने लगे हैं?

आइए समझते हैं इस विवाद के 3 बड़े कारण:

1. युवाओं में भारी लोकप्रियता (स्टार इमेज)

राघव चड्ढा की फैन फॉलोइंग और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता किसी स्टार से कम नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक उनकी अच्छी पकड़ है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि उनकी इस ‘स्टार इमेज’ और तेजी से बढ़ती लोकप्रियता से पार्टी के कुछ पुराने और सीनियर नेताओं को शायद इनसिक्योरिटी (असुरक्षा) होने लगी थी।

2. बहुत कम समय में बढ़ता राजनीतिक कद

पंजाब चुनाव हो या दिल्ली की राजनीति, बहुत ही कम उम्र में राघव चड्ढा ने पार्टी में 1 बड़ा मुकाम हासिल कर लिया था। बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड के उनका इतनी जल्दी नंबर 1 नेताओं की लिस्ट में आना, पार्टी के अंदर ही कई लोगों की आँखों में खटक रहा था।

3. खुद के फैसले लेना और स्वतंत्र पहचान

राघव चड्ढा संसद में जो भी जनहित के मुद्दे उठाते थे, वो सीधे जनता से जुड़े होते थे। सूत्रों की मानें तो पार्टी के शीर्ष नेताओं को यह बात पसंद नहीं आ रही थी कि राघव उनसे पूछे बिना अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं। पार्टी को लगा कि वो अपनी एक अलग लाइन और स्वतंत्र पहचान बना रहे हैं, जो पार्टी के कुछ नेताओं को रास नहीं आया।

क्या कहा राघव चड्ढा ने?

इस विवाद पर राघव चड्ढा ने सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि, “मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूँ।” उन्होंने पूछा कि क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई गुनाह है?

अब यह सवाल जनता के बीच है कि क्या यह सिर्फ पार्टी के अनुशासन की बात है, या फिर पार्टी के अंदर ही कुछ नेता राघव की तरक्की से परेशान हो गए थे? क्या राघव चड्ढा को उनकी अपनी ही काबिलियत की सजा मिल रही है?

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