राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बड़ा हादसा हुआ है। मालवीय नगर के एक 5-स्टार होटल के बेसमेंट में चल रहे रेस्टोरेंट में आग लगने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही और जुगाड़ू काम का नतीजा है।

दिल्ली:

दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक 5-स्टार होटल के बेसमेंट में चल रहे ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट’ में भयानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। ताजा जानकारी के मुताबिक, इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 17 तक बताया जा रहा है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

कैसे ‘जुगाड़’ और लापरवाही बनी मौत का कारण?

इस तरह के हादसों के बाद हमेशा एक ही कहानी सामने आती है – नियमों की अनदेखी और शॉर्टकट। इस हादसे में भी शुरुआती तौर पर कई बड़ी लापरवाहियां सामने आ रही हैं:

 बेसमेंट का गलत इस्तेमाल: नियमों के मुताबिक बेसमेंट का इस्तेमाल कमर्शियल किचन या भारी भीड़ वाले रेस्टोरेंट के लिए करना बहुत खतरनाक है। फिर भी ‘जुगाड़’ से यहां रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था।

 फायर सेफ्टी सिस्टम का फेल होना: इतने बड़े होटल और रेस्टोरेंट में आग बुझाने के उपकरण (Fire Extinguishers) या तो मौजूद नहीं थे, या ऐन वक्त पर काम नहीं आए। वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम (Water Sprinklers) भी फेल साबित हुए।

 इमरजेंसी एग्जिट न होना: आग लगने पर लोग जान बचाने के लिए भागते हैं, लेकिन बेसमेंट में एंट्री और एग्जिट का रास्ता इतना संकरा था कि वहां भगदड़ मच गई। कोई सुरक्षित इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) नहीं था।

 बिजली के तारों का जंजाल: अक्सर ऐसे होटलों में पैसे बचाने के लिए बिजली की फिटिंग में जुगाड़ किया जाता है। घटिया केबल और ओवरलोडिंग के कारण ही शॉर्ट सर्किट होते हैं जो इतनी बड़ी आग का रूप ले लेते हैं।

आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों ने अपने परिवार वालों को खोया है, उन्हें जवाब कौन देगा?

1 होटल और रेस्टोरेंट मालिक: चंद रुपयों का मुनाफा कमाने के लिए लोगों की जान दांव पर लगाने वाले मालिक सबसे पहले जिम्मेदार हैं।

2 नगर निगम (MCD) और प्रशासन: क्या बिना रिश्वत या मिलीभगत के बेसमेंट में इतने बड़े रेस्टोरेंट को चलने की परमिशन मिल सकती है? जब चेकिंग होती है, तो अधिकारी आंखें क्यों मूंद लेते हैं?

3 फायर डिपार्टमेंट: क्या इस रेस्टोरेंट के पास फायर एनओसी (Fire NOC) थी? अगर थी, तो वह कैसे दे दी गई जब वहां सेफ्टी के कोई इंतजाम ही नहीं थे?

यह हादसा हमारे सिस्टम के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जब तक ‘जुगाड़’ से काम चलाने की मानसिकता खत्म नहीं होगी और भ्रष्ट अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि इस मामले की कड़ी जांच हो और दोषियों को ऐसी सजा मिले जो एक मिसाल बन जाए।

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