भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने अपनी सुरक्षा को लेकर कोर्ट में चिंता जताई है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई गंभीर अपराधियों को सजा सुनाई है, जो उसी जेल में हो सकते हैं, इसलिए उन्हें अलग सेल दिया जाए। भोपाल। एक समय था जब अदालत में उनकी कलम से बड़े-बड़े अपराधियों को जेल की हवा खानी पड़ती थी, लेकिन आज वही पूर्व जज खुद जेल में हैं और उन्हें अपनी जान का खतरा सता रहा है। मध्य प्रदेश की पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने अदालत में गुहार लगाई है कि उन्हें जेल में एक अलग सेल (बैरक) में रखा जाए। पूर्व जज का कहना है कि उन्होंने जज रहते हुए कई आरोपियों को कड़ी सजाएं सुनाई हैं। अब उनमें से कई अपराधी उसी जेल में बंद होंगे। ऐसे में उनके और उनके साथ मौजूद समर्थ की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। कोई भी अपराधी पुरानी रंजिश के चलते जेल के अंदर उन पर हमला कर सकता है। बुजुर्ग होने के बावजूद CBI पर परेशान करने का आरोप कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने सीबीआई (CBI) की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह एक बुजुर्ग महिला हैं, लेकिन सीन रिक्रिएशन के नाम पर सीबीआई ने उन्हें बहुत परेशान किया। एजेंसी उन्हें बार-बार छत पर ले गई और जानबूझकर उनकी गाड़ी को घर से 3 मकान दूर खड़ा किया गया, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। 4 साल भोपाल में रहीं जज, 39 को सुनाई थी सजा गिरिबाला सिंह का न्यायिक करियर काफी लंबा रहा है। वह फरवरी 2023 में भोपाल की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से रिटायर हुई थीं। इस पद पर वह करीब 19 महीने रहीं। इससे पहले सितंबर 2015 से नवंबर 2017 (करीब 27 महीने) तक उन्होंने भोपाल जिला अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में भी काम किया था। अपने इन 4 सालों के कार्यकाल में उन्होंने कई बड़े फैसले लिए: जिला जज के रूप में: उनके पास कुल 1129 मामले आए थे। इनमें से 56 सेशन ट्रायल में उन्होंने फैसला सुनाया। 27 आरोपियों को उन्होंने दोषी करार दिया, जिनमें 12 हत्या के आरोपी भी शामिल थे जिन्हें आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा दी गई। अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में: उनके सामने 190 मामले आए। इनमें से 31 आपराधिक मामलों का निपटारा करते हुए 12 लोगों को दोषी ठहराया। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के 22 मामलों में फैसला देते हुए 10 आरोपियों को सजा सुनाई थी। वकीलों और आरोपियों के बीच भी हुई तीखी बहस इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में अन्य विवाद भी सामने आए। आरोपी समर्थ के वकील ने शिकायत की कि समर्थ के पैर में चोट है, लेकिन सीबीआई उसे मेडिकल रिलीफ (स्प्रे तक) नहीं दे रही है। वहीं, समर्थ ने जबलपुर के एक वकील अनुराग श्रीवास्तव पर मारपीट का आरोप लगाया। हालांकि, वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट में सफाई देते हुए मारपीट से इनकार किया। उन्होंने बताया कि समर्थ पर 30 हजार रुपये का इनाम था और वह जबलपुर कोर्ट में लाइट बंद करके छिपा हुआ था, जिसे उन्होंने पकड़वाया। कोर्ट के सीसीटीवी फुटेज में भी सच्चाई देखी जा सकती है। फिलहाल, पूर्व जज की सुरक्षा की मांग ने इस मामले को और भी ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह है कि जेल प्रशासन उनकी सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation मप्र बनेगा देश का पहला राज्य: ई-रिकॉर्ड्स रूल्स 2026 के बाद कोर्ट में डिजिटल सबूत देने पर जब्त नहीं होगा आपका मोबाइल!