कोलकाता, 6 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी 2026 विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी आज दोपहर 2 बजे से कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मेट्रो चैनल में धरने पर बैठ गई हैं। यह राजनीतिक बवाल चुनाव आयोग (ECI) द्वारा हाल ही में जारी की गई फाइनल वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) से लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने के विरोध में शुरू हुआ है। क्या है विवाद की जड़? हाल ही में चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूची का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (Special Intensive Revision – SIR) पूरा किया है। इसके बाद जारी की गई फाइनल लिस्ट में से बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं या उन्हें “अंडर एडजुडिकेशन” (जांच के अधीन) की श्रेणी में डाल दिया गया है। टीएमसी का दावा है कि यह एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। TMC के मुख्य आरोप: “असली वोटरों को किया जा रहा है टारगेट” धरना स्थल से ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। • चुनिंदा समुदायों को निशाना: टीएमसी का आरोप है कि जानबूझकर उन इलाकों, अल्पसंख्यक समुदायों, SC/ST और मतुआ समाज के लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो कथित तौर पर टीएमसी के कोर वोटर माने जाते हैं। • लोकतंत्र की हत्या का आरोप: मुख्यमंत्री ने इसे 2026 के चुनावों को हाईजैक करने की कोशिश करार दिया है। उनका कहना है कि जब तक सभी वैध नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में वापस नहीं जोड़े जाते, उनका यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। BJP का पलटवार: “सिर्फ गैर-नागरिकों और फर्जी वोटरों की हो रही सफाई” इस मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ममता बनर्जी की ‘बौखलाहट’ बताया है। • पारदर्शी चुनाव की वकालत: बंगाल बीजेपी के नेताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और वह केवल ‘फर्जी मतदाताओं’ और ‘अवैध घुसपैठियों’ (Non-citizens) के नाम हटाकर वोटर लिस्ट को साफ कर रही है, जो एक निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है। • हार के डर का तंज: बीजेपी नेताओं ने ममता के धरने पर तंज कसते हुए बयान दिया है कि टीएमसी को 2026 में अपनी हार साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी अभी से विपक्ष के नेता के रूप में धरने पर बैठने की प्रैक्टिस कर रही हैं।” आगे क्या? मेट्रो चैनल पर टीएमसी समर्थकों की भारी भीड़ जुट रही है और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले ‘मतदाता सूची’ का यह विवाद बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला सड़क से लेकर अदालत तक जा सकता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation भोपाल में कांग्रेस का ‘किसान सम्मेलन’: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भरी हुंकार आधी रात का ड्रामा, तिहाड़ जेल और अंततः आज़ादी: जानिए युवा कांग्रेस अध्यक्ष की रिहाई के पीछे का पूरा राजनीतिक सच!